त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साल 2019 में हुए एक राष्ट्रीयकृत बैंक के मैनेजर की हत्या के मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया है। इन दोनों आरोपियों को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं—सुमित चौधरी और सुमित बनिक की अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि सड़क पर अचानक हुई इस हिंसक झड़प में “समान मंशा” (Common Intention) का कानूनी सिद्धांत लागू नहीं होता है।
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा निचली अदालत का फैसला?
फैसले के बाद पत्रकारों से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रत सरकार ने हाईकोर्ट के इस निर्णय की कानूनी वजहों को स्पष्ट किया।
उन्होंने बताया, “जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ की अगुवाई वाली खंडपीठ ने मंगलवार को दोनों याचिकाकर्ताओं को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत का मानना था कि इस अचानक हुई वारदात में पहले से तय किसी ‘समान मंशा’ का प्रावधान मेल नहीं खाता है।” इसी तकनीकी और कानूनी आधार पर अदालत ने दोनों की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया।
क्या था 2019 का पूरा मामला?
यह पूरा मामला 3 अगस्त 2019 का है। उत्तर त्रिपुरा में एक राष्ट्रीयकृत बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर) बोधिसत्व दास की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी।
मामले के विवरण के अनुसार, वारदात वाले दिन सड़क किनारे शराब पी रहे चार लोगों के समूह और बैंक मैनेजर बोधिसत्व दास के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई थी। देखते ही देखते यह बहस एक गंभीर हिंसक झड़प में बदल गई, जिसके दौरान दास पर चाकू से हमला किया गया और उनकी मौत हो गई।
इस घटना के चार साल बाद, यानी 2023 में पश्चिम त्रिपुरा की जिला एवं सत्र अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए चार लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने इन चारों को कठोर सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई थी:
- सुमित चौधरी
- सुमित बनिक
- सुकांत बिस्वास (रिकॉर्ड में सुनाक्ता दास)
- उमर शरीफ
बाकी दो दोषियों की वर्तमान कानूनी स्थिति
जहाँ एक तरफ सुमित चौधरी और सुमित बनिक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है, वहीं इस मामले के बाकी दो दोषियों की कानूनी स्थिति अलग है:
- उमर शरीफ: त्रिपुरा उच्च न्यायालय पहले ही उमर शरीफ की ओर से दायर की गई पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर चुका है, जिससे उसकी उम्रकैद की सजा बरकरार है।
- सुकांत बिस्वास (सुनाक्ता दास): इस दोषी ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अभी तक उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में कोई अपील या चुनौती दायर नहीं की है।

