केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में ‘पदी पूजा’ बुकिंग प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर गंभीर संज्ञान लेते हुए मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी (एसपी) को सभी संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने यह आदेश उस सतर्कता जांच के बाद पारित किया जिसमें पाया गया कि कुछ बुकिंग फर्जी या काल्पनिक पते देकर की गई थीं और बाद में उन्हें अधिक धन लेकर अनधिकृत रूप से स्थानांतरित किया गया।
खंडपीठ ने सतर्कता निष्कर्षों को “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि यदि फर्जी बुकिंग और धन लेकर उनके हस्तांतरण के आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसा आचरण “घोर आपत्तिजनक” है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।
न्यायालय ने यह भी नोट किया कि जब सतर्कता अधिकारी ने पहचान सत्यापन पर जोर दिया तो बुकिंग कराने वाले दो व्यक्ति पदी पूजा सम्पन्न करने के लिए उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने कहा कि यह परिस्थिति इस आशंका को बल देती है कि बुकिंग प्रणाली का दुरुपयोग हुआ हो सकता है।
अदालत ने निर्देश दिया:
“हम मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी (पुलिस अधीक्षक) को निर्देश देते हैं कि वे पदी पूजा बुकिंग से संबंधित सभी रजिस्टर और अभिलेखों को तत्काल अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रखें… और उनकी अखंडता सुनिश्चित करने तथा उचित न्यायिक परीक्षण के लिए उन्हें सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।”
अदालत ने विशेष रूप से यह भी जानकारी मांगी कि वर्ष 2045 तक की बुकिंग किस प्रकार की गई।
कार्यकारी अधिकारी की ओर से बताया गया कि पदी पूजा की बुकिंग वर्ष 2045 तक हो चुकी है। इस पर अदालत ने कहा कि लगभग दो दशक आगे तक की बुकिंग इस अनुष्ठान की भारी मांग को दर्शाती है और साथ ही एक पारदर्शी तथा सख्त नियामक प्रणाली की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि मंदिर अनुष्ठानों की पवित्रता और बुकिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता से संबंधित प्रश्न है।
पदी पूजा ‘पुष्पाभिषेकम’ के बाद चयनित दिनों में की जाती है, जिसमें पथिनेट्टमपडी (18 पवित्र सीढ़ियों) को फूलों और रेशमी वस्त्रों से सजाया जाता है, प्रत्येक सीढ़ी पर दीप जलाए जाते हैं और अंत में तंत्रि द्वारा आरती की जाती है। यह अनुष्ठान हर महीने पाँच बार होता है और भक्तों के लिए अत्यंत धार्मिक महत्व रखता है।
मामले को आगे की सुनवाई के लिए 4 मार्च को सूचीबद्ध किया गया है, जब अदालत सीलबंद अभिलेखों का परीक्षण करेगी और आगे की कार्यवाही तय करेगी।

