सुबह 10:45 बजे “उजाला होने वाला है”? ‘फिल्मी स्क्रिप्ट’ जैसी एफआईआर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को लगाई फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए स्थानीय पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को “फिल्मी स्क्रिप्ट” जैसा और अतार्किक बताया है। पुलिस की कहानी में मौजूद स्पष्ट विसंगतियों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक (SP) से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का विस्तार से हवाला दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 22 जनवरी, 2026 को बहराइच जिले के जरवल रोड पुलिस स्टेशन में अकबर अली और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 13 से संबंधित है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 325 और 109(1), आर्म्स एक्ट की धारा 25, 4 और 4, तथा यूपी गोवध निवारण अधिनियम, 1955 की धारा 3, 5 और 8 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस की एफआईआर के अनुसार, एक ‘मुखबिर खास’ ने गोकशी की सूचना दी थी। मौके पर पहुंचने पर पुलिस का दावा है कि उन्होंने आरोपियों को यह कहते सुना, “उजाला होने वाला है।” इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, जिस पर कथित तौर पर जवाब मिला, “ये पुलिस वाले हैं, इनको गोली मारो, बचकर नहीं जाने चाहिए।” इसके बाद पुलिस ने फायरिंग की, और एक आरोपी कथित तौर पर चिल्लाया, “हाय गोली लग गई।” पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने बाद में इस मामले में याचिकाकर्ता की संलिप्तता का नाम लिया।

पक्षकारों की दलीलें

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याची अकबर अली की ओर से अधिवक्ता नावेद आलम, भानु प्रताप सिंह, नवीन अवस्थी और प्रतीक मिश्रा ने हाईकोर्ट में पैरवी की। उन्होंने एफआईआर को चुनौती देते हुए पुलिस की मनमानी कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) पेश हुए।

कोर्ट का विश्लेषण

जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एफआईआर की ड्राफ्टिंग पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह “फिल्मी स्क्रिप्ट का एक उदाहरण है, जो प्रतिवादी-अधिकारियों द्वारा दर्ज की जा रही एफआईआर में बार-बार देखने को मिल रहा है।”

हाईकोर्ट ने घटना के समय को लेकर एक बहुत बड़ी तथ्यात्मक विसंगति को उजागर किया। एफआईआर 22 जनवरी को दोपहर 14:24 बजे (2:24 PM) दर्ज की गई थी, और घटना का समय उसी दिन सुबह 10:45 बजे बताया गया था। इसके बावजूद, पुलिस की कहानी में दावा किया गया कि घटना के समय आरोपी कह रहे थे, “उजाला होने वाला है।”

पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “इस प्रकार, यदि घटना सुबह 10:45 बजे हुई बताई गई है और एफआईआर में भी ऐसा ही उल्लेख है, तो यह समझ से परे है कि सुबह 10:45 बजे उजाला होना कैसे बाकी है!! एफआईआर में यह स्पष्ट विसंगति अधिकारियों के इशारे पर कानून के दुरुपयोग को दर्शाती है, जिससे यह एफआईआर रद्द किए जाने योग्य हो जाती है।”

इसके अलावा, कोर्ट ने ध्यान दिया कि पुलिस ने फिल्मों के लोकप्रिय डायलॉग का इस्तेमाल किया, जैसे: “तुम लोग पुलिस से घिर चुके हो, आत्मसमर्पण कर दो।”

पीठ ने जोर देकर कहा कि “एफआईआर में इस्तेमाल की जा रही भाषा जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाती है, बल्कि यह सुनी-सुनाई, स्क्रिप्टेड और फिल्मी स्क्रिप्ट से भारी मात्रा में उधार ली गई प्रतीत होती है और यह पूरी तरह काल्पनिक व अत्यधिक अतिरंजित है।”

कानूनी नजीर पर भरोसा करते हुए, हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल [1992 Supp (1) SCC 335] में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। पीठ ने विशेष रूप से फैसले की श्रेणी (5) का आह्वान किया, जो यह तय करता है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत असाधारण शक्ति का प्रयोग कब किया जा सकता है: “(5) जहां एफआईआर या शिकायत में लगाए गए आरोप इतने बेतुके और स्वाभाविक रूप से असंभव हैं जिसके आधार पर कोई भी समझदार व्यक्ति कभी भी इस उचित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता कि आरोपी के खिलाफ कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार है।” हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान एफआईआर में लगाए गए आरोप इस विवरण पर पूरी तरह फिट बैठते हैं।

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निर्णय

मामले को गंभीरता से लेते हुए, हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक (SP), जिला बहराइच को एफआईआर में स्पष्ट विसंगतियों का जवाब देते हुए दो सप्ताह के भीतर अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च, 2026 तय की और स्पष्ट निर्देश दिया: “यदि व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है, तो जिला बहराइच के पुलिस अधीक्षक अगली तारीख पर कोर्ट की सहायता के लिए रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे।”

अंतरिम राहत प्रदान करते हुए, पीठ ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक “विवादित एफआईआर के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।”

  • केस का शीर्षक: अकबर अली बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (सचिव गृह विभाग, लखनऊ एवं अन्य)
  • केस नंबर: क्रिमिनल मिसलेनियस रिट पिटीशन नंबर 1393 वर्ष 2026

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