“ग्रीन कॉपर” परियोजना को लेकर वेदांता की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने TNPCB और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया

मद्रास हाईकोर्ट की पहली पीठ ने बुधवार को वेदांता लिमिटेड की उस याचिका पर तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) को नोटिस जारी किया, जिसमें थूथुकुडी स्थित बंद स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर प्लांट में “ग्रीन कॉपर” परियोजना को शुरू करने की अनुमति न देने के TNPCB के आदेश को चुनौती दी गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को तय की है।

मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई।

वेदांता लिमिटेड ने अपनी याचिका में कहा कि TNPCB का आदेश प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण है क्योंकि इसे पूर्व सूचना दिए बिना और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित किया गया है। कंपनी ने तर्क दिया कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करता है।

कंपनी ने यह भी कहा कि “वायु प्रदूषण (अनुमति की स्वीकृति, अस्वीकृति या निरसन) दिशा-निर्देश, 2025” के नियम 6(3) के तहत निरीक्षण से पूर्व पूर्व-नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में निरीक्षण बिना सूचना के किया गया, जो आदेश को असंवैधानिक और अस्थिर बनाता है।

याचिका में कहा गया है कि TNPCB का निर्णय इस गलत धारणा पर आधारित है कि अतीत में हुई घटनाएं और न्यायिक कार्यवाही, कंपनी को स्थायी रूप से किसी भी नई परियोजना से अयोग्य बना देती हैं।

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वेदांता ने तर्क दिया, “अतीत की घटनाओं के आधार पर पर्यावरणीय रूप से उन्नत और पुनः डिज़ाइन की गई सुविधा के प्रस्ताव पर विचार करने से इनकार करना विधिक या न्यायिक मिसाल के अनुरूप नहीं है और यह एक अवैध डिफैक्टो प्रतिबंध जैसा है।”

कंपनी ने कहा कि तांबा एक रणनीतिक संसाधन है, जिसकी वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक मांग है। ऐसे में “ग्रीन कॉपर” परियोजना घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक सतत, जिम्मेदार और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित समाधान है, जिससे पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक विकास और रोजगार में संतुलन स्थापित होगा।

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वेदांता ने मांग की है कि हाईकोर्ट TNPCB, पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खान मंत्रालय और स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक बहु-अनुशासनिक विशेषज्ञ समिति का गठन करे, जो “ग्रीन कॉपर” प्रस्ताव की वैज्ञानिक और स्वतंत्र जांच करे और रिपोर्ट सौंपे।

अब यह मामला 26 फरवरी को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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