दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द करने के CAT आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द करने के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

मुख्य न्यायाधीश अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र और वानखेड़े की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।

समीर वानखेड़े, 2008 बैच के IRS अधिकारी, 2021 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), मुंबई में जोनल डायरेक्टर थे। उन्होंने क्रूज ड्रग्स केस में अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान को गिरफ्तार किया था, जिससे वह सुर्खियों में आए। बाद में वानखेड़े पर ₹25 करोड़ की कथित मांग कर आर्यन को फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।

18 अगस्त 2025 को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी, जिसे वानखेड़े ने CAT में चुनौती दी। CAT ने 19 जनवरी 2026 को ‘चार्ज मेमोरेंडम’ रद्द करते हुए कार्रवाई को खारिज कर दिया।

सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि CAT द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई को ‘मालाफाइड’ यानी दुर्भावनापूर्ण करार देना केवल एक अप्रमाणित दावा था, जिसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया गया।

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उन्होंने कहा कि वानखेड़े द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में संलग्न 2 जून 2022 की कॉल ट्रांसक्रिप्ट से स्पष्ट होता है कि सेवा से हटने के बावजूद उन्होंने NCB की कानूनी टीम से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की और जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया।

सरकारी वकील ने यह भी कहा कि CAT का यह निष्कर्ष कि आरोप स्पष्ट नहीं थे, गलत है, और अगर कोई प्रक्रिया संबंधी त्रुटि थी तो विभाग को उसे सुधारने का मौका मिलना चाहिए था।

वानखेड़े की ओर से पेश वकील ने CAT के आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि यह कार्रवाई केवल उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वानखेड़े ने वाकई कोई गलत काम किया था, तो NCB के उस वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई जिससे उन्होंने कथित ‘आश्वासन’ मांगा था।

उन्होंने कहा, “जिस तरीके से उन्हें चार्जशीट किया गया है, वह प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण है। CAT का आदेश कायम रहना चाहिए।”

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उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के CAT के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, लेकिन यह निर्देश दिया था कि CAT 14 जनवरी या उसके 10 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करे।

अब जबकि हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, इस निर्णय का असर न केवल वानखेड़े की सेवा पर पड़ेगा, बल्कि इससे यह भी तय होगा कि CAT की निगरानी में प्रशासनिक अधिकारियों की अनुशासनात्मक शक्तियों की सीमाएं क्या होंगी।

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