टैक्स वसूलने वाले अधिकारी सभी व्यवसाइयों को धोखेबाज नही बता सकते: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स अथॉरिटी द्वारा वस्तु एंव सेवा कर जीएसटी के लागू करने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि टैक्स वसूलने वाले अधिकारी सभी व्यवसाइयों को धोखेबाज नही बता सकते। 

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा संसद की मंशा थी कि जीएसटी नागरिकों के अनुकूल कर ढांचा हो,लेकिन जिस तरह इसे देश भर में लागू किया जा रहा है वह इसके उद्देश्य को खत्म कर रहा है। पीठ हिमांचल प्रदेश जीएसटी अधिनियम के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 

अधिनियम की धारा 83 के तहत मामले की कार्यवाही के दौरान अथॉरिटी द्वारा बैंक खाते समेत संपति को अस्थायी रूप से जब्त करने का प्रावधान है। राधाकृष्ण इंडस्ट्रीज द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि जब्ती की कार्यवाई का प्रावधान बेरहम व कठोर है। 

कोर्ट ने कहा अफसरों द्वारा बिना किसी जवाबदेही के व्यवसाइयों से भारी रकम की मांग की जाती है। यदि 10 हजार करोड़ की मांग की जाती है तो कोर्ट उसे घटाकर एक हजार कर देती है। इससे कर अधिकारियों का आकलन समझा जा सकता है।

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पीठ ने कहा अधिकारियों को सरकार के राजस्व को संरक्षित करने और अच्छी नियत से व्यवसाय करने वालों के मध्य संतुलन स्थापित करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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