अधिकारियों को तलब किये जाने पर सुप्रीम कोर्ट बेहद नाराज

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट के रोक के आदेश के बाद भी हाई कोर्ट में आला अधिकारियों को तलब किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी और हैरानी जताई है। कोर्ट ने अफसरों को हरदम कोर्ट में तलब करने भी जायज न मानते हुए अधिकारियों की पेशी के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तरप्रदेश के मेडिकल हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के एडिशनल चीफ सेकेट्री अमित मोहन प्रसाद और डायरेक्टर जनरल मेडिकल एंड हेल्थ डॉक्टर देवेंद्र सिंह नेगी को कोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में गुरुवार को निजी तौर पर पेश होने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के रोक के आदेश के बाबजूद दोनों अफसरों को अब गुरुवार को पेश नही होना पड़ेगा। 

उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिकारियों की पेशी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ के समक्ष कहा कि हाई कोर्ट ने जिस आदेश की अवहेलना में अधिकारियों को पेश होने का आदेश दिया है। उस पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है। 

अधिवक्ता जैन ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश पर रोक लगाए जाने की जानकारी हाई कोर्ट को दी थी,लेकिन फिर भी हाई कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 8 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले को देख कर कहा कि वे हाई कोर्ट का आदेश देख कर वे सकते में हैं। 

जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी थी तो फिर उस आदेश की अवहेलना की कार्यवाही हाई कोर्ट कैसे सुन सकता है। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पूर्व में भी कई बार अपने फैसलों में उच्च अधिकारियों को बेवजह कोर्ट में तलब किये जाने की प्रवति को हतोत्साहित कर चुका है। 

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इस तरह शक्ति का दुरुपयोग कर लोगो का न्यायपालिका में भरोसा कम नही किया जा सकता। जितनी ज्यादा शक्ति होती है उतनी ही जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उच्च अधिकारियों को अक्सर कोर्ट में बुलाया जाना सही नही कहा जा सकता।

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