जंतर-मंतर हमला मामला: हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को 21 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दिल्ली की एक अदालत ने जंतर-मंतर पर एक छात्रा कार्यकर्ता के पिता पर हुए कथित हमले के मामले में हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सोमवार, 7 सितंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने भारद्वाज की हिरासत अवधि 21 सितंबर तक बढ़ाने का आदेश जारी किया।

पुलिस ने भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पकड़ा था। इसके बाद शनिवार को उन्हें न्यायाधीश लालेर के आवास पर पेश किया गया, जहां अदालत ने पुलिस को एक दिन की पूछताछ के लिए हिरासत सौंपी। रविवार को अदालत ने उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था, जिसे सोमवार को बढ़ाकर दो सप्ताह के लिए तय कर दिया गया।

यह पूरा मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा कार्यकर्ता के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में आपराधिक धमकी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत धाराएं जोड़ी गई हैं।

विवादित बयान और दावों पर विवाद

भारद्वाज की गिरफ्तारी का दबाव उस समय बढ़ा जब उनका एक साक्षात्कार सोशल मीडिया पर सामने आया। इस वीडियो में भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि उन्होंने छात्रा के पिता का सिर फोड़ दिया था, जिसके चलते पीड़ित को 60 टांके आए थे। वीडियो में उन्होंने यह भी कहा था कि यह कृत्य धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आता है और अपने राजनीतिक रसूख के कारण वे अब तक गिरफ्तारी से बचे रहे।

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हालांकि, बाद में एक पॉडकास्ट के दौरान भारद्वाज ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम आत्मरक्षा में उठाया था। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का पूर्व में कहना था कि संजय कुमार को आई चोटें सामान्य प्रकृति की थीं और वे एक स्टील के कड़े से लगी थीं।

शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान सीजेपी के प्रतिनिधियों और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख तथा नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर भारद्वाज के खिलाफ हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और एससी/एसटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

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पॉक्सो और साइबर उत्पीड़न का अलग मामला दर्ज

इसी बीच शुक्रवार को पुलिस ने एक नाबालिग छात्रा कार्यकर्ता की शिकायत पर भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की।

छात्रा का आरोप है कि अपने पिता पर हुए हमले के खिलाफ आवाज उठाने और शिकायत दर्ज कराने के बाद से उसे लगातार सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही थीं। पीड़िता ने बलात्कार की धमकियां देने, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और तस्वीरों से छेड़छाड़ (मॉर्फिंग) कर वायरल करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना), धारा 79 (महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाना) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है।

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