कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं के उत्पीड़न पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा– FIR दर्ज करें, हम कानून-व्यवस्था के मामलों की निगरानी नहीं करेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं को परेशान करने वाले तथाकथित “एंटी-फीडर विगिलांटियों” के आरोपों पर वह कोई आदेश नहीं देगा। न्यायालय ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था का मामला है और पीड़ित महिलाएं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकती हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजनिया की विशेष पीठ आवारा कुत्तों से जुड़े मुद्दों पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें पहले के आदेशों में संशोधन और सख्ती से अनुपालन की मांग की गई है।

सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के नाम पर कुछ विगिलांटी समूह महिलाओं को परेशान कर रहे हैं, उन्हें पीटा जा रहा है, और कुछ मामलों में छेड़छाड़ तक की जा रही है।

इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, “उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कीजिए। आपको कौन रोक रहा है?” उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य आपराधिक श्रेणी में आते हैं और संबंधित कानून के तहत कार्यवाही की जा सकती है।

जब पावनी ने हरियाणा और गाजियाबाद में महिलाओं के साथ हुई मारपीट की घटनाओं का जिक्र किया, तो पीठ ने दोहराया, “यदि कोई आपराधिक कृत्य हुआ है, तो उसके लिए तय प्रक्रियाएं और कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। हम इस तरह के व्यक्तिगत मामलों की निगरानी नहीं कर सकते।”

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जब महिला वकील ने तर्क दिया कि कुछ महिलाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं, तो कोर्ट ने कहा, “हमने किसी को इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं दिया है। अगर ऐसा हो रहा है तो आप कार्रवाई करें।”

पावनी द्वारा अवैध ब्रीडिंग और विदेशी नस्लों के आयात का मुद्दा उठाने पर पीठ ने कहा, “यह मामला केवल आवारा कुत्तों तक सीमित है। कृपया इस मंच का इस्तेमाल अन्य मुद्दों के लिए न करें।”

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न्यायमूर्ति मेहता ने कटाक्ष करते हुए कहा, “कल आप कहेंगे कि कुनो में चीते क्यों लाए गए? देसी नस्लों की देखभाल क्यों नहीं हो रही?”

जब एक वकील ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एक कुत्ते की मौजूदगी का जिक्र किया, तो बेंच ने कहा, “सड़क के कुत्तों में टिक्स (कीट) होते हैं। अगर ऐसा कुत्ता अस्पताल में चला गया, तो क्या आप समझते हैं कि इसके क्या खतरनाक परिणाम हो सकते हैं?”

न्यायमूर्ति नाथ ने यूट्यूब पर मौजूद वीडियो का हवाला देते हुए कहा, “ऐसे अनगिनत वीडियो हैं जिनमें कुत्तों द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर हमले दिखाए गए हैं।”

सुप्रीम कोर्ट जुलाई 2023 में मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेकर यह मामला देख रहा है, जिसमें आवारा कुत्तों के काटने से बच्चों में रेबीज फैलने की घटनाएं सामने आई थीं।

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7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद स्थायी आश्रय स्थलों में भेजा जाए और उन्हें वापस उसी स्थान पर न छोड़ा जाए। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से सभी आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया गया था।

गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने हर कुत्ते को सड़कों से हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि केवल Animal Birth Control (ABC) Rules के अनुसार उन्हें संभालने को कहा है।

सुनवाई अब 13 जनवरी को फिर से होगी।

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