दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों की मान्यता पर चुनाव आयोग की शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें चुनाव आयोग (ECI) द्वारा राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी के रूप में मान्यता देने की वैधता को चुनौती दी गई थी। यह याचिका हिंद सम्राज्य पार्टी ने दायर की थी, जो एक पंजीकृत राजनीतिक दल है।

न्यायमूर्ति नितिन डब्ल्यू सांब्रे और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ ने संक्षेप में कहा:

“यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में तय किया जा चुका है। हमने याचिका खारिज कर दी है।”

हालांकि विस्तृत निर्णय की प्रति अभी उपलब्ध नहीं है।

हिंद सम्राज्य पार्टी ने चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 की धाराओं 6A, 6B और 6C की वैधता को चुनौती दी, जिनके तहत किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी की मान्यता दी जाती है।

READ ALSO  पुलिस एनकाउंटर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती: गाइडलाइंस का उल्लंघन हुआ तो जिम्मेदार होंगे एसपी, भुगतनी होगी अवमानना की कार्यवाही

याचिका में कहा गया कि:

  • चुनाव आयोग को इस प्रकार की मान्यता देने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
  • यह व्यवस्था नवगठित दलों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करती है, क्योंकि उन्हें चुनाव चिन्ह नामांकन पत्रों की जांच के बाद ही मिलता है, जिससे उनके प्रचार का समय बहुत कम रह जाता है।
  • पहले से मान्यता प्राप्त दलों को विशेष सुविधाएं और पूर्व-आवंटित चुनाव चिन्ह मिलते हैं, जो असमानता पैदा करते हैं।
  • यह पूरी व्यवस्था संविधान, लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ है।
READ ALSO  'प्रशासनिक सुस्ती' पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार: नेशनल चंबल सेंचुरी में खनन माफिया को रोकने के लिए हाई-टेक निगरानी के निर्देश

याचिका में कहा गया, “राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को मान्यता देने वाली 6A, 6B और 6C धाराएं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की भावना के विरुद्ध हैं और संविधान के बुनियादी ढांचे – स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव – के खिलाफ हैं।”

इस आदेश के तहत चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह किसी दल को उसकी चुनावी प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय दल घोषित कर सकता है और उन्हें विशिष्ट चिन्ह आरक्षित कर सकता है। इस मान्यता के तहत दलों को प्रचार, चुनाव चिन्ह और अन्य चुनावी सुविधाओं में प्राथमिकता मिलती है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद वर्तमान मान्यता प्रणाली यथावत रहेगी और राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग द्वारा तय मापदंडों के आधार पर ही मान्यता मिलती रहेगी।

READ ALSO  अयोध्या कि तरह ञानवापी मस्जिद में भी मिला मंदिर और देवी देवताओं कि मूर्तियाँ: एएसआई कि रिपोर्ट में दावा

हालांकि, विस्तृत आदेश आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट ने किन कानूनी आधारों पर याचिका को खारिज किया। याचिकाकर्ता चाहें तो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles