सुप्रीम कोर्ट में ‘समाधान समारोह’ पहल के तहत आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत के पहले दिन 400 से अधिक लंबित मामलों को आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। शुक्रवार को शुरू हुए इस विशेष आयोजन में 16 अलग-अलग पीठों के समक्ष 600 से अधिक मामले सूचीबद्ध किए गए थे। यह विशेष लोक अदालत 23 अगस्त तक चलेगी।
विभिन्न प्रकार के विवादों की हुई सुनवाई
इस विशेष अभियान के दौरान शीर्ष अदालत में लंबित कई महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े मामलों को विचार के लिए रखा गया। इनमें वैवाहिक विवाद, संपत्ति के झगड़े, मोटर दुर्घटना दावे, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामले, कर विवाद तथा सेवा एवं श्रम संबंधी मुकदमे शामिल हैं।
16 पीठों के माध्यम से संवाद प्रक्रिया
मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए गठित 16 विशेष पीठों में से प्रत्येक में सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और अन्य कानूनी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस प्रक्रिया में एक पूर्व-समझौता तंत्र (प्रि-सेटलमेंट प्रोसेस) भी शामिल है। इसके तहत पीठों ने दोनों पक्षों और उनके वकीलों को आमने-सामने बैठाकर लंबी मुकदमेबाजी के बजाय सहमति से समाधान निकालने में मदद की।
मध्यस्थता को बढ़ावा देने की पहल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आयोजन न्याय वितरण प्रणाली के तहत मध्यस्थता और सर्वसम्मति से विवाद निपटाने के तरीकों को सुदृढ़ करने की उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अदालत के अनुसार, इस पहल से पक्षकारों को सीधे बातचीत के जरिए अपने मामले सुलझाने का अवसर मिलता है, वहीं अदालतों पर मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने में भी सहायता मिलती है।

