सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद में याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में SIR प्रक्रिया को कानून के अनुरूप बताते हुए दावा किया है कि इससे संबंधित आदेशों और फैसलों को आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को राज्यसभा सांसद डोला सेन की नई याचिका पर भी चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार में SIR के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना मतदाता पंजीकरण के फॉर्म 6 में बदलाव किए गए।
फॉर्म 6 में बदलाव के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
डोला सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद मेनका गुरुस्वामी ने चुनाव आयोग के उस दावे पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त थी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस मामले से जुड़े सभी मुद्दों की जांच करेगी।
पीठ ने पहले याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को भी चुनाव आयोग के जवाबी हलफनामे पर 10 दिनों के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया। आयोग ने अपना हलफनामा सोमवार देर शाम दाखिल किया था।
चुनाव आयोग ने 248 पन्नों के हलफनामे में आरोपों को नकारा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में आयोग ने 248 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है।
आयोग ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग की ओर से उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु ने यह हलफनामा दाखिल किया। इसमें आयोग ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि हलफनामा दाखिल करने का फैसला उसके तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिया गया था। आयोग के अनुसार, SIR से जुड़े संबंधित आदेशों और फैसलों को भी सभी सदस्यों की मंजूरी प्राप्त थी।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 25 सितंबर को सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद अदालत पहुंचा। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति इस बात को लेकर थी कि कुछ आदेश और फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।
इन आरोपों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विरोध प्रदर्शन किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
अब सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं का जवाब मिलने के बाद इन विवादित मुद्दों पर आगे विचार करेगा।
