झारखंड हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली एक महिला अधिवक्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले की जांच अब पुलिस उपाधीक्षक (DSP) को सौंपी जाएगी। झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट को यह आश्वासन दिया है। मृतका के भाई ने अदालत में याचिका दाखिल कर मामले की निष्पक्ष, उचित और समयबद्ध जांच की मांग की है।
जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय ने 26 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश प्राप्त करने का समय दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे निर्धारित की है और मामले को सूची में सबसे ऊपर रखने का निर्देश दिया है।
महिला वकील की मौत पर भाई ने उठाए सवाल
मामला हजारीबाग के बड़ा बाजार थाने में दर्ज केस नंबर 258/2026 से जुड़ा है।
मृतका के भाई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने अधिवक्ता नवीन कुमार, विकास कुमार और अंशु कुमारी के साथ अदालत में पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि महिला अधिवक्ता की मौत की परिस्थितियां प्रथम दृष्टया संदेह पैदा करती हैं और यह हत्या का मामला प्रतीत होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि मृतका के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए थे। इसके अलावा जब उसका शव छत के पंखे से लटका मिला, तब उसके पैर जमीन को छू रहे थे।
इन परिस्थितियों के आधार पर याचिकाकर्ता ने मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।
कोर्ट में दिखाया गया घटनास्थल का वीडियो
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने घटनास्थल का एक वीडियो भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि वीडियो देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मृतका के पैर जमीन को छू रहे थे।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इन परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए उचित स्तर पर जांच कराई जानी चाहिए।
तीन घंटे के भीतर दो पोस्टमार्टम होने का दावा
याचिकाकर्ता की ओर से पुलिस जांच के तरीके पर भी सवाल उठाए गए।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एक उभरती हुई महिला वकील की मौत जैसे गंभीर मामले की जांच पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा की जा रही थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मृतका के शव का तीन घंटे के भीतर दो बार पोस्टमार्टम किया गया।
इसके अलावा याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मृतका के पति सहित परिवार के कुछ सदस्य फरार हैं, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
इन आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ता ने जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
राज्य सरकार ने DSP से जांच कराने का दिया आश्वासन
झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव ने अदालत को आश्वासन दिया कि अब इस मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है, तो जांच की प्रगति अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव पेश हुए। उनके साथ अधिवक्ता शिवानी जलुका भी उपस्थित थीं।
2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता और राज्य सरकार की ओर से रखी गई दलीलों का संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को तय की।
जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय ने निर्देश दिया कि मामले को सुबह 11:30 बजे सुनवाई के लिए सूची में सबसे ऊपर रखा जाए।
फिलहाल हाईकोर्ट ने महिला अधिवक्ता की मौत के कारण या याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
केस डिटेल्स
केस का नाम: Devjeet Chakravarty vs. The Union of India & Ors.
केस नंबर: W.P. (Cr.) (Filing) No. 25211 of 2026
पीठ: जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय
आदेश की तारीख: 26 अक्टूबर 2026
अगली सुनवाई: 2 नवंबर 2026
