गुजरात हाईकोर्ट ने नशीली दवाओं के अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा है कि ड्रग्स से जुड़े अपराधों की गंभीरता की तुलना हत्या जैसे अपराध से की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि हत्या में एक या दो लोगों की जान जा सकती है, जबकि नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल लोग बड़ी संख्या में निर्दोष युवाओं की जिंदगी को खतरे में डालते हैं।
जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने 21 अक्टूबर के आदेश में कहा कि जमानत पर विचार करते समय किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज के व्यापक हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। कोर्ट ने विशेष रूप से किशोरों और विद्यार्थियों में बढ़ती नशे की लत पर चिंता जताई।
यह मामला नेल पॉलिश और नेल पॉलिश रिमूवर बनाने की आड़ में अल्प्राजोलम (Alprazolam) नामक नशीली दवा के अवैध निर्माण से जुड़ा है। कोर्ट ने आरोपी की कथित सक्रिय भूमिका और उसे अवैध गतिविधियों की जानकारी होने के आधार पर जमानत याचिका खारिज कर दी।
ड्रग्स का अवैध कारोबार समाज के लिए गंभीर खतरा
हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत अपराधों की गंभीरता पर विचार करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
कोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले में आरोपी एक या दो लोगों की जान ले सकता है, जबकि नशीले पदार्थों का कारोबार करने वाले लोग अनेक निर्दोष और कमजोर युवाओं की मौत या उनकी जिंदगी को गंभीर नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में ड्रग्स की अवैध तस्करी के कारण आम लोगों, विशेषकर किशोरों और विद्यार्थियों में नशे की लत एक गंभीर समस्या बन गई है।
कोर्ट के अनुसार, जब किसी आरोपी पर समाज के लिए घातक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हों, तो कार्यवाही लंबित रहने के दौरान उसे हिरासत में रखना समाज के हित में हो सकता है।
फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान 47.7 किलो अल्प्राजोलम बरामद
मामला गुजरात के वलसाड स्थित एक परिसर में कथित रूप से चल रही अवैध दवा निर्माण इकाई से संबंधित है।
अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान वहां अल्प्राजोलम का अवैध निर्माण होते पाया गया। परिसर में नेल पॉलिश और नेल पॉलिश रिमूवर बनाने के नाम पर यह गतिविधि संचालित की जा रही थी।
जांच एजेंसी ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान लगभग 47.7 किलोग्राम अल्प्राजोलम बरामद हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी में कुल 113.99 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए।
आरोपी को 5 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों का आरोप है कि छापेमारी के समय वह एक मजदूर के साथ परिसर में मौजूद था और जांच में उसके दवा निर्माण गतिविधियों में सीधे शामिल होने की बात सामने आई।
अल्प्राजोलम का सामान्य रूप से चिंता और अवसाद के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसका अवैध उपयोग अन्य नशीले पदार्थों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
बचाव पक्ष ने कहा, आरोपी की भूमिका केवल सुपरवाइजर की थी
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.डी. नानावटी और अधिवक्ता राहिल पी. जैन ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी की भूमिका केवल फैक्ट्री में सुपरवाइजर की थी। साथ ही, उसके फरार होने की कोई आशंका नहीं है और वह जमानत मिलने पर कोर्ट की सभी शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता हेतवी संचेती ने जमानत का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान आरोपी परिसर में मौजूद था, जहां बड़ी मात्रा में तैयार और अधबने नशीले पदार्थ मिले थे।
अधिकारियों का दावा था कि आरोपी केवल निर्माण इकाई को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रहा था, बल्कि दवाओं के निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल था। उस पर निर्माण कार्य में पैसा लगाने और मुनाफे में हिस्सेदारी रखने का भी आरोप लगाया गया।
अवैध निर्माण की जानकारी और सक्रिय भागीदारी को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध सामग्री पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी की भूमिका केवल सुपरवाइजर तक सीमित नहीं थी।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी को परिसर में चल रही अवैध गतिविधियों की पूरी जानकारी थी और वह कथित रूप से अल्प्राजोलम के निर्माण में सक्रिय भागीदारी कर रहा था।
हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि नशीली दवा का निर्माण नेल पॉलिश और नेल पॉलिश रिमूवर बनाने की आड़ में किया जा रहा था।
कोर्ट ने बरामद नशीले पदार्थों की बड़ी मात्रा, आरोपी की कथित भूमिका और ऐसे अपराधों के समाज पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को देखते हुए उसे जमानत देने से इनकार कर दिया।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
