‘एंबेसी जाने के लिए बस पकड़ो’: दुबई में फंसे भारतीय इंजीनियर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, कोर्ट ने कहा— दूतावास से मांगें मदद

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दुबई में रह रहे एक भारतीय नागरिक को राहत देने से इनकार कर दिया, जिसने स्थानीय अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने और ‘ड्रग माफिया’ के जाल में फंसने का दावा किया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीधे न्यायिक हस्तक्षेप के बजाय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने केरल के स्थायी निवासी और पेशे से इंजीनियर आसिफ आज़ाद की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब आज़ाद दुबई के एक शॉपिंग मॉल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए।

आसिफ आज़ाद ने आरोप लगाया कि दुबई में उनके खिलाफ एक ‘ड्रग माफिया’ ने साजिश रची है, जिसके कारण उन पर वहां से बाहर जाने पर प्रतिबंध (ट्रैवल बैन) लगा दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस समूह ने उनके फर्जी चेक बनवाए, जिसकी वजह से वह कानूनी मुश्किलों में फंस गए और दुबई की अदालतों ने उन पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया।

सुनवाई के दौरान आज़ाद ने अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण) के तहत अपने अधिकारों की बहाली की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ एक अवैध अप्रवासी की तरह व्यवहार किया जा रहा है और उनके साथ मारपीट भी की गई है। उन्होंने बेंच से कहा, “रात में मुझे लात मारी गई; सीसीटीवी में इसके सबूत मौजूद हैं।”

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने केरल में दर्ज एक संबंधित मामले की जांच पर भी असंतोष जताया। उन्होंने इसे ‘एकतरफा’ बताते हुए दावा किया कि पिछले 40 दिनों से जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है।

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बेंच ने याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई कहानी पर संदेह व्यक्त किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “हमने याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत रूप से सुना है। हम यहां बताई गई कहानी को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें दूतावास जाना चाहिए।”

जब चीफ जस्टिस ने उनकी वर्तमान लोकेशन के बारे में पूछा, तो आज़ाद ने बताया कि वह दुबई के एक मॉल में हैं। यह जानने पर कि भारतीय दूतावास वहां से लगभग 20 किलोमीटर दूर है, चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने टिप्पणी की, “तो भारतीय दूतावास जाइए। वहां जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) उपलब्ध है।”

आज़ाद ने डर जताया कि अगर उन्होंने दूतावास जाने की कोशिश की तो उन्हें पकड़ा जा सकता है।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि केरल के कुछ विधायक उनके खिलाफ काम कर रहे हैं।

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राज्य में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए चीफ जस्टिस ने मजाकिया अंदाज में कहा, “जैसा कि आप टीवी पर देख रहे होंगे, अब वहां कुछ बदलाव हो रहा है। इसलिए, बदली हुई सरकार का लाभ उठाएं।”

अंततः कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेशी यात्रा प्रतिबंधों जैसे मामलों में तत्काल राहत के लिए याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के बजाय यूएई में राजनयिक चैनलों का उपयोग करना चाहिए।

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