सरकार का दावा बेड ख़ाली, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीच सुनवायी में करवाया फ़ोन, खुल गयी पोल

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोरोना मरीजों के इलाज के अमानवीय हालातों को स्वतः संज्ञान में लेते हुए 27 अप्रैल को राज्य सरकार से कई पहलुओं पर जवाब तलब किया था।

अतिरिक्त महाअधिवक्ता मनीष गोयल ने दो दिनों का और वक्त मांगते हुए कहा कि जवाब दाखिल करने के लिए विस्तृत हलफनामा तैयार किया जा रहा है। जिसमे कोर्ट द्वारा मांगी गई सम्पूर्ण जानकारी शामिल है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के एडवोकेट अनुज सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी हॉस्पिटलों में लेवल दो और तीन के खाली बेड की संख्या बताने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है,किन्तु उसमे गलत सूचना दी जा रही है।

जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने एडवोकेट अनुज को सुनवाई के दौरान ही कोर्ट रूम से फोन करने के लिए निर्देश दिया। जब कॉल की गई तो हाई कोर्ट के समक्ष अस्पताल ने जवाब दिया कि लेवल 2 और 3 का कोई बेड खाली नही है।

उस वक्त भी पोर्टल पर खाली पड़े बेड शो हो रहे थे।इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह पोर्टल संदेह पैदा करता है। सरकार इस बात का दावा ठोकती है कि राज्य में 17614 आइसोलेशन बेड और 5510 आईसीयू बेड उपलब्ध हैं। और इनकी कोई कमी नही है लेकिन वास्तविकता बिल्कुल उलट है। 


Also Read

जब्त मेडिकल सामग्री की मालखाने में बर्बादी–पुलिस द्वारा अवैध रूप से जब्त किए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन, ऑक्सीजन सिलिंडर, मेडिकल दवाएं मालखाने में रखे जाने और कोर्ट ने कहा कि इन मेडिकल सामग्रियों को मालखाने में रखना किसी भी तरह से जनहित में नही हैं,क्योंकि यह वहाँ पड़े पड़े सब खराब हो जाएंगे इस पर एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कहा कि वह इस मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाएंगे। जिससे इन वस्तुओं का उचित उपयोग हो सके।

Download Law Trend App

Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles