पटना में गंगा नदी के तटबंधों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नौज़र घाट से नूरपुर घाट के बीच स्थित सभी अवैध निर्माणों को छह सप्ताह के भीतर पूरी तरह से हटाने का निर्देश दिया है।
जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने 21 जुलाई को जारी अपने आदेश में कहा कि पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अतिक्रमण हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। पीठ ने आगाह किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।
अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के सख्त निर्देश
अदालत ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को आगामी सुनवाई से पूर्व अतिक्रमण हटाने की पूरी कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करते हुए एक औपचारिक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को करेगा।
एनजीटी के आदेश को दी गई थी चुनौती
यह कानूनी कार्रवाई याचिकाकर्ता अशोक कुमार सिन्हा की अपील पर शुरू हुई है, जिनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ कर रहे हैं। सिन्हा ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 20 जून 2020 के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें गंगा तट पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वशिष्ठ ने पीठ को अवगत कराया कि वर्ष 2023 में दीघा घाट से नौज़र घाट तक के क्षेत्र में ही 213 अवैध निर्माणों की पहचान की गई थी।

