देशभर में बच्चों के अपहरण और व्यपहरण (किडनैपिंग) के मामलों की समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई के लिए एक समान राष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर दायर जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
तीन सदस्यीय पीठ ने जारी किए नोटिस
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की पीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने केंद्र और राज्यों के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय तथा भारत के विधि आयोग को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
समयबद्ध जांच और समर्पित अदालतों की मांग
यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल की है। याचिका में मांग की गई है कि नाबालिग बच्चों के अपहरण और गायब होने से जुड़े गंभीर अपराधों से निपटने के लिए पूरे देश में एक मानकीकृत जांच प्रक्रिया लागू की जाए। इसके साथ ही इन मामलों की जांच एक निश्चित समयसीमा के भीतर पूरी करने और तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों के गठन का निर्देश देने की अपील की गई है।
प्रशासनिक तालमेल और व्यवस्थागत कमियों पर चिंता
याचिकाकर्ता ने लापता और अपहृत बच्चों को तलाशने के मामले में प्रशासनिक तंत्र की गंभीर चूकों और व्यवस्थागत विफलताओं की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और तत्परता का अभाव बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि सभी जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में तत्परता और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने के लिए बाध्य हों।

