सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब हमलों (एसिड अटैक) के पीड़ितों को इलाज के लिए बड़े शहरों में आने-जाने के लिए वातानुकूलित (एसी) श्रेणी के रेल टिकटों में रियायत देने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने गुरुवार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अर्चना पाठक दवे को रेल मंत्रालय से इस विषय में आवश्यक निर्देश लेने को कहा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को यह विचार करने का सुझाव दिया कि क्या तेजाब हमला पीड़ितों को कैंसर और थैलेसीमिया जैसी अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है, जिन्हें पहले से ही रेल यात्रा में रियायती टिकट की सुविधा मिलती है।
इलाज के लिए सफर में बड़ी बाधाएं
यह मामला ‘अतिजीवन सोसाइटी’ नाम के संगठन की ओर से दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में तेजाब हमला पीड़ितों के लिए रेलवे आरक्षण और रियायती टिकटों की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि इन पीड़ितों को त्वचा की रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, आंखों के जटिल ऑपरेशनों और सर्जरी के बाद की लंबी देखभाल के लिए दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगरों के चुनिंदा सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में बार-बार जाना पड़ता है। यह इलाज आम तौर पर चार से पांच साल तक चलता है।
याचिका में कहा गया है कि गंभीर रूप से जलने, लगातार होने वाली खुजली और सर्जरी के बाद के नाजुक घावों के कारण इन पीड़ितों के लिए एसी कोच में यात्रा करना एक चिकित्सीय जरूरत है। हालांकि, एसी टिकटों का भारी खर्च कई पीड़ितों के लिए उठा पाना संभव नहीं होता। मौजूदा व्यवस्था के कारण वे न तो दिव्यांगों (PwD) के लिए तय आरक्षण कोटे का लाभ ले पाते हैं और न ही रियायती किराए के हकदार बन पाते हैं।
प्रशासनिक जटिलताएं और मौजूदा नियम
याचिका में उन प्रशासनिक अड़चनों का भी उल्लेख किया गया है, जिनका सामना पीड़ितों को करना पड़ता है। विशेष रूप से जिन लोगों को जबरन तेजाब पिलाया गया है, उन्हें रियायत का दावा करने के लिए अस्पतालों से आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
दूसरी ओर, एएसजी अर्चना पाठक दवे ने पीठ को बताया कि रेल मंत्रालय वर्तमान में दिव्यांगों की 21 श्रेणियों के तहत आने वाले लोगों को यात्रा में रियायत प्रदान करता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मंत्रालय सभी दिव्यांग श्रेणियों के लिए एक आपातकालीन यात्रा कोटा प्रणाली लागू करने की योजना पर भी काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने, जिसने इससे पहले याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था, मामले की अगली सुनवाई कानून अधिकारी को रेल मंत्रालय से निर्देश मिलने तक टाल दी है।

