शराब नीति मामला: आप नेताओं को हाईकोर्ट से जवाब के लिए मिली आखिरी मोहलत

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट सीबीआई की उस पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें निचली अदालत द्वारा इन नेताओं को बरी (डिस्चार्ज) किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।

वकीलों की हड़ताल के कारण टली सुनवाई

जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 और 18 अगस्त की तारीख तय की है, जिसमें जांच एजेंसी की ओर से दलीलें सुनी जाएंगी। गुरुवार (16 जुलाई) को तय सुनवाई के दौरान आप नेताओं की तरफ से कोई भी वकील अदालत में पेश नहीं हुआ। दिल्ली की जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट के वकील 14 जुलाई से काम का बहिष्कार कर रहे हैं। इसी हड़ताल के कारण गुरुवार को मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाना पड़ा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रजिस्ट्री की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि उत्तरदाता संख्या 8, 18 और 19 की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। जस्टिस जैन ने अपने आदेश में कहा कि हालांकि इन्हें पहले भी कई बार अवसर दिए जा चुके हैं, लेकिन न्याय के हित को ध्यान में रखते हुए इन्हें जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी लिखित दलीलें भी सौंपने का निर्देश दिया।

सीबीआई ने लगाया सुनवाई टालने का आरोप

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सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि आप नेताओं को पहले भी जवाब दाखिल करने के कई मौके मिले हैं और इस मामले में पहले ही काफी देरी हो चुकी है। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले को जुलाई या अगस्त की शुरुआत की किसी नजदीकी तारीख पर सुना जाए।

इस पर जस्टिस जैन ने कहा कि सांसदों और विधायकों (MP/MLAs) से जुड़े कई अन्य मामले लंबित होने के कारण तुरंत तारीख देना संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि वे इस मामले को किसी जल्दी की तारीख पर सूचीबद्ध करने की संभावनाओं का दोबारा मूल्यांकन करेंगे। जस्टिस जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि अगली सुनवाई की तारीख आगे की दी जा रही है, इसलिए आप नेताओं को इस बीच अपना जवाब दाखिल करने की पूरी स्वतंत्रता होगी। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के लिए 17 और 18 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे का समय निर्धारित किया।

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इससे पहले 25 मई को भी कोर्ट ने सुनवाई को 16 जुलाई तक के लिए टाल दिया था, ताकि आप नेताओं के वकीलों की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके। इन नेताओं ने पूर्व में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रही सुनवाई का बहिष्कार किया था।

निचली अदालत के फैसले से शुरू हुआ कानूनी विवाद

यह पूरा विवाद इस साल 27 फरवरी को आए ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ। तब ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को इस मामले में डिस्चार्ज कर दिया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी का यह मामला न्यायिक समीक्षा के सामने टिकने लायक नहीं है और यह पूरी तरह खारिज होने योग्य है।

इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 9 मार्च को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने निचली अदालत की उस सिफारिश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई थी। सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए जस्टिस शर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि प्रथम दृष्टया निचली अदालत के निष्कर्ष त्रुटिपूर्ण प्रतीत होते हैं और इन पर विचार किए जाने की जरूरत है।

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सोशल मीडिया पोस्ट और बेंच बदलने का घटनाक्रम

इस बीच, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और कुछ अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा पर पूर्वाग्रह का अंदेशा जताते हुए उनसे इस मामले की सुनवाई से हटने (recusal) की मांग की थी। 20 अप्रैल को जस्टिस शर्मा ने इस मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद आप नेताओं ने जस्टिस शर्मा को पत्र लिखकर सूचित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से या अपने वकीलों के माध्यम से उनके समक्ष पेश नहीं होंगे और “सत्याग्रह का रास्ता” अपनाएंगे।

सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर जस्टिस शर्मा ने 14 मई को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की और मामले को दूसरी बेंच को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद यह मामला जस्टिस मनोज जैन की बेंच के पास स्थानांतरित हुआ। 19 मई को जब यह मामला पहली बार जस्टिस जैन के सामने आया, तो उन्होंने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह आरोपियों को बेंच में हुए इस बदलाव की जानकारी दे।

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