सिंगूर विवाद: टाटा मोटर्स मामले में WBIDC को राहत नहीं, कोर्ट ने ₹765 करोड़ के भुगतान पर बिना शर्त रोक से किया इनकार

पश्चिम बंगाल सरकार की इकाई WBIDC को सिंगूर विवाद मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने टाटा मोटर्स के पक्ष में दिए गए ₹765 करोड़ से अधिक के आर्बिट्रेशन अवार्ड (मध्यस्थता फैसले) पर बिना शर्त रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस अनिरुद्ध रॉय ने स्पष्ट किया कि कोर्ट इस भुगतान पर रोक तभी लगाएगा, जब निगम अपनी संपत्तियों की गारंटी और भुगतान का पुख्ता भरोसा देगा।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) को अगले आठ हफ्तों के भीतर एक हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें निगम को कोलकाता और अन्य स्थानों पर मौजूद अपनी उन सभी अचल संपत्तियों का ब्योरा देना होगा, जो किसी भी कानूनी विवाद या कर्ज से मुक्त हैं।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि इन संपत्तियों की कीमत टाटा मोटर्स को दी जाने वाली कुल राशि (मूलधन + 11% वार्षिक ब्याज) से कम बैठती है, तो निगम को बाकी रकम नकद सुरक्षा (cash security) के रूप में जमा करनी होगी। फिलहाल कोर्ट ने केवल आठ सप्ताह के लिए एक अंतरिम रोक लगाई है, जो शर्तों के पूरा न होने पर अपने आप खत्म हो जाएगी।

यह कानूनी लड़ाई साल 2008 से जुड़ी है, जब टाटा मोटर्स को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में अपनी महत्वाकांक्षी ‘नैनो’ कार परियोजना को बंद करना पड़ा था। तत्कालीन विपक्षी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए तीव्र भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के कारण कंपनी ने अपने प्लांट को गुजरात के साणंद में स्थानांतरित कर दिया था।

सालों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, 30 अक्टूबर 2023 को एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण (arbitration tribunal) ने टाटा मोटर्स के पक्ष में फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल ने WBIDC को आदेश दिया था कि वह टाटा मोटर्स को ₹765.78 करोड़ की राशि और उस पर 11 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करे।

WBIDC ने हाई कोर्ट में तर्क दिया था कि वह एक सरकारी इकाई है, इसलिए उसे बिना किसी शर्त या सुरक्षा जमा किए इस फैसले पर रोक मिलनी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

जस्टिस रॉय ने निर्देश दिया कि निगम को यह लिखित वचन देना होगा कि यदि अंतिम फैसले में आर्बिट्रेशन अवार्ड बरकरार रहता है, तो उसे आठ सप्ताह के भीतर पूरी राशि चुकानी होगी। यदि निगम तय समय सीमा में अपनी संपत्तियों का ब्योरा या नकद सुरक्षा जमा करने में विफल रहता है, तो टाटा मोटर्स इस भारी-भरकम राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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