कर्नल पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच को दी मंजूरी, पुलिसकर्मियों की याचिका खारिज

सेना के एक कर्नल और उनके बेटे पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब पुलिस के अधिकारियों द्वारा सीबीआई जांच के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। शीर्ष अदालत ने पुलिस के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए कहा, “जब सेना सीमा पर -40 डिग्री तापमान में तैनात है, तब आप अपने घर में चैन की नींद सो रहे होते हैं।”

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “जब युद्ध होता है तो आप इन सेना अधिकारियों का महिमामंडन करते हैं… सेना के लोगों के लिए थोड़ा सम्मान रखिए। इस तरह की कानूनहीनता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जांच अब सीबीआई ही करेगी।”

यह घटना 13 और 14 मार्च, 2025 की रात की है, जब कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ और उनके बेटे पटियाला में एक ढाबे पर खाना खा रहे थे। कर्नल का आरोप है कि पार्किंग विवाद को लेकर पंजाब पुलिस के 12 अधिकारी, जिनमें चार इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल थे, उनके और उनके बेटे पर हमला कर दिया। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनका पहचान पत्र और मोबाइल फोन छीन लिया और फर्जी मुठभेड़ की धमकी भी दी—यह सब सार्वजनिक स्थान पर और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हुआ।

मामले की प्रारंभिक जांच पंजाब पुलिस द्वारा की जा रही थी, लेकिन कर्नल बाथ ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच की कोई संभावना नहीं थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल को जांच चंडीगढ़ पुलिस को सौंपी और चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया।

हालांकि, जांच में प्रगति न होने और किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को मामला सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में इसी आदेश को चुनौती दी थी।

कर्नल बाथ की ओर से पेश अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन महीने बीत जाने के बावजूद न तो कोई गिरफ्तारी हुई और न ही किसी आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट या अन्य कानूनी कार्रवाई की गई, जिससे जांच एजेंसी की निष्क्रियता स्पष्ट होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “सीबीआई ही अब इस मामले की जांच करेगी। जो लोग आपकी रक्षा के लिए सीमा पर तैनात रहते हैं, वे तिरंगे में लिपटकर लौटते हैं।”

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