पश्चिम बंगाल चुनाव: ‘फ्रीज’ हुई वोटर लिस्ट के खिलाफ याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग (EC) द्वारा मतदाता सूची को ‘फ्रीज’ करने के फैसले को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को 13 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया है, जो राज्य में दो चरणों में होने वाले मतदान से ठीक कुछ दिन पहले है।

यह मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए लाया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कई अपीलें अभी भी लंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने लिस्ट को फाइनल कर दिया है।

निर्वाहचन आयोग ने पहले चरण के चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया था। ‘फ्रीजिंग’ का अर्थ है कि अब किसी भी नए व्यक्ति का नाम, जिसका नाम पहले हटाया गया था, इस चुनाव के लिए लिस्ट में नहीं जोड़ा जा सकता। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब उनकी अपीलें लंबित हैं, तो आयोग की यह समयसीमा उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कर रही है।

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डी.एस. नायडू ने स्पष्ट किया कि 9 अप्रैल की कट-ऑफ तारीख के बाद किसी भी नए नाम पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि ये अपीलकर्ता उन लोगों के समान ही हैं जिनकी अपील स्वीकार कर ली गई थी, लेकिन अब समयसीमा समाप्त हो चुकी है।

इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने कहा, “चुनाव के संबंध में एक कट-ऑफ लाइन होती है, लेकिन इसके पीछे मतदाता सूची में होने और भविष्य के चुनावों में वोट देने का एक संवैधानिक अधिकार भी है। वह अधिकार कहीं अधिक स्थायी और उच्च स्तर का है।”

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हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने टिप्पणी की कि वर्तमान मतदाता सूची से बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

इससे पहले 6 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने पाया था कि विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जा चुका है।

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प्रक्रिया में एकरूपता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया था कि वे पूर्व न्यायाधीशों का एक तीन सदस्यीय पैनल गठित करें। यह पैनल उन 19 ट्रिब्यूनल के लिए एक समान प्रक्रिया तैयार करेगा, जो मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं। सभी चरणों के लिए वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी। 13 अप्रैल को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी जो मतदान के पहले चरण से ठीक पहले अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराना चाहते हैं।

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