कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय सेना के एक जवान के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि जिस समय पश्चिम बंगाल के हुगली में मारपीट की घटना का दावा किया गया था, उस वक्त जवान हजारों किलोमीटर दूर मणिपुर के इम्फाल में अपनी सैन्य ड्यूटी पर तैनात था। जस्टिस उदय कुमार ने 25 अगस्त को सुनाए अपने फैसले में कहा कि देश के किसी सेवारत जवान को झूठी और दुर्भावनापूर्ण पुलिस शिकायत के आधार पर मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर करना न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है।
सैन्य अधिकारी द्वारा प्रदान किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड और कमांडिंग ऑफिसर के प्रमाणपत्र से यह सिद्ध हुआ कि 5 अक्टूबर 2023 को सुबह 6:30 बजे कथित वारदात के समय जवान इम्फाल में अपनी इकाई में उपस्थित था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए एक ही समय में दो सुदूर भौगोलिक स्थानों पर मौजूद होना भौतिक रूप से असंभव है। कोर्ट ने इस शिकायत को दीवानी विवाद में अनुचित दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।
प्रॉपर्टी विवाद और झूठे आरोप
यह विवाद हुगली में पड़ोसी परिवारों के बीच संपत्ति, जल निकासी और चार फीट के साझा रास्ते के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चले आ रहे तनाव का नतीजा था। दोनों पक्षों के बीच दीवानी मुकदमा लंबित रहने के दौरान, एक पड़ोसी ने 6 दिसंबर 2023 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 5 अक्टूबर 2023 की सुबह जवान, उसके भाई और अन्य अज्ञात सहयोगियों ने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की, उसकी बहन से संपत्ति खाली करने को कहा, 7,500 रुपये नकद लूटे और धमकी दी। हालांकि जांच में यह स्थापित हो गया कि आरोपी जवान घटना के समय इम्फाल में था।
भाई के खिलाफ जारी रहेगी आपराधिक कार्यवाही
अदालत ने जहां सेना के जवान के खिलाफ मामला समाप्त कर दिया, वहीं उसके स्थानीय निवासी भाई के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और चोट रिपोर्टों के आधार पर साझा रास्ते को लेकर हाथापाई और गलत तरीके से रोकने का मामला प्रथम दृष्टया बनता है।
इसके साथ ही कोर्ट ने शुरुआती पुलिस प्रक्रिया में खामी की ओर इशारा करते हुए कहा कि यद्यपि पुलिस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में जवान का नाम शामिल नहीं किया था, फिर भी अदालती कार्यवाहियों में उसे सह-याचिकाकर्ता के रूप में दर्शाया जाना एक प्रक्रियात्मक त्रुटि थी।
अदालत में याचिकाकर्ता भाइयों का पक्ष अधिवक्ता गुंजन कुमार सिंह और रूपसा माइती ने रखा। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता रमाशिस मुखर्जी और नील चक्रवर्ती तथा शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता सायन कांजीलाल और कौस्तव शोम पेश हुए।

