सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गौतम बुद्ध नगर जिला अदालत में बार-बार होने वाली हड़तालों पर कड़ा रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट को बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही में लगातार बाधा डालने वालों के खिलाफ “त्वरित कार्रवाई” आवश्यक है।
यह मामला वीरेंद्र सिंह द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। शीर्ष अदालत ने गौतम बुद्ध नगर बार एसोसिएशन के रवैये पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एसोसिएशन लगातार काम से अलग रहने के प्रस्ताव पारित कर रही है। यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2024 के उस फैसले का उल्लंघन है, जिसमें जिला बार एसोसिएशनों को हड़ताल करने या काम रोकने के प्रस्ताव पारित करने से स्पष्ट रूप से रोका गया था।
दिसंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने कहा था कि बार एसोसिएशनों की ऐसी गतिविधियां न्याय वितरण प्रणाली और वादियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने गौर किया कि स्थानीय बार के नेतृत्व ने अदालत के अधिकार की लगातार अनदेखी की है। सीजेआई (CJI) ने टिप्पणी की, “गौतम बुद्ध नगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बार-बार अदालत के निर्देशों की अवहेलना की है।”
हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने इस मामले की जांच के लिए पहले ही तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि अब तत्काल और सख्त हस्तक्षेप की जरूरत है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बेंच ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- हड़ताल की रिपोर्ट: गौतम बुद्ध नगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को उन विशिष्ट दिनों का विस्तृत विवरण इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया गया है, जब बार सदस्यों ने काम बंद रखा था।
- तत्काल समीक्षा: हाईकोर्ट की न्यायाधीशों की समिति को इस रिपोर्ट की तुरंत जांच करने का निर्देश दिया गया है।
- दंडात्मक कार्रवाई: समिति को निर्देश दिया गया है कि वह दिसंबर 2024 के फैसले के अनुपालन में जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करे।
अदालत का यह आदेश इस सिद्धांत को दोहराता है कि कानूनी व्यवस्था में बार एसोसिएशनों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन हड़ताल के माध्यम से काम का बार-बार निलंबन पेशेवर नैतिकता और न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन है।

