सबरीमाला मंदिर घी घोटाला: केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे नए सिरे से जांच

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में चढ़ावे के घी की बिक्री में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। केरल सरकार ने हाईकोर्ट को सूचित किया है कि इस मामले में भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज करने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक वरिष्ठ जांचकर्ता को नियुक्त किया गया है। इसके बाद, हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को दो महीने के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

23 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

जस्टिस राजा विजयाराघवन वी. और जस्टिस के. वी. जयकुमार की पीठ ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) के एर्नाकुलम स्पेशल सेल में तैनात एसपी एम. जे. सोजन (आईपीएस) को इस मामले की कमान सौंपी है। हाईकोर्ट ने उन्हें ऑडिट विभाग और मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट सहित सभी केस रिकॉर्ड की बारीक जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जांच अधिकारी की उस मांग को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने आपराधिक जिम्मेदारी तय करने समेत अन्य जरूरी कदम उठाने के लिए दो महीने का समय मांगा था। अब उन्हें 23 सितंबर तक कोर्ट में अपनी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

विजिलेंस की पिछली रिपोर्ट हाईकोर्ट ने की खारिज

यह नया निर्देश हाईकोर्ट की ओर से 9 जून को दिए गए उस आदेश के बाद आया है, जिसमें त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के कर्मचारियों द्वारा की गई कथित वित्तीय गड़बड़ी का स्वतंत्र मूल्यांकन करने को कहा गया था। दरअसल, हाईकोर्ट विजिलेंस विभाग की पिछली जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि विजिलेंस की जांच रिपोर्ट देवस्वोम बोर्ड को हुए वित्तीय नुकसान की गंभीरता को बेहद कम करके आंकती दिख रही है।

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अपनी पिछली रिपोर्ट में विजिलेंस का कहना था कि रिकॉर्ड का सही रखरखाव न होने के कारण उस अवधि के दौरान तैनात मंदिर के विशेष अधिकारियों और काउंटर स्टाफ की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करना संभव नहीं है। विजिलेंस ने सभी 43 आरोपी कर्मचारियों को सामूहिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए केवल उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब शुरुआती जांच में ही भारी वित्तीय नुकसान, खातों में गड़बड़ी और मंदिर की संपत्ति का हिसाब न मिलने जैसे गंभीर तथ्य सामने आ चुके हों, तो मामले की गहराई से जांच होना बेहद जरूरी हो जाता है। कोर्ट के अनुसार, यह मामला संदेह से परे ईमानदारी, प्रमाणित योग्यता और पर्याप्त अनुभव वाले किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दोबारा जांचे जाने के पूरी तरह योग्य है।

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद सबरीमाला मंदिर के सन्निधानम में श्रद्धालुओं को बांटे जाने वाले ‘अधिया सिष्टम घी’ (एक पवित्र चढ़ावा) की बिक्री से जुड़ा है। आरोप है कि 17 नवंबर, 2025 से 27 दिसंबर, 2025 के बीच चले तीर्थयात्रा सीजन के दौरान देवस्वोम बोर्ड को 17 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब टीडीबी के मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी की एक रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि मंदिर परिसर में बेचे गए घी के 16,628 पैकेटों की बिक्री से मिली रकम को देवस्वोम के आधिकारिक खाते में जमा ही नहीं किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने खुद (स्वतः संज्ञान लेते हुए) इस याचिका पर सुनवाई शुरू की थी।

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