आरएसएस मानहानि मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव को नोटिस जारी किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट का यह फैसला एक ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आया है, जिसमें मंत्री राव को इस आपराधिक मानहानि के मुकदमे से राहत देते हुए उनके खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई थी।

जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दिनेश गुंडू राव को नोटिस भेजा और अगली सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है। यह याचिका आरएसएस सदस्य और शिकायतकर्ता तेजस ए की ओर से दायर की गई है। तेजस ने निचली अदालत के 27 जून के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कोर्ट ने उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर केवल कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, जबकि दिनेश गुंडू राव को इससे बरी कर दिया था।

ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई और याचिकाकर्ता की दलीलें

ट्रायल कोर्ट ने जहां स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ कार्यवाही रोक दी थी, वहीं गृह मंत्री प्रियांक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद के खिलाफ आरोपों का संज्ञान लिया था। कोर्ट ने इन दोनों नेताओं को 21 जुलाई को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी किया है।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता तेजस का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील वेंकटेश एस दलवई ने दलील दी कि जब दिनेश गुंडू राव पर भी अन्य आरोपियों की तरह ही समान आरोप लगाए गए थे, तो ट्रायल कोर्ट का उनके खिलाफ शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करना पूरी तरह गलत था।

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मूल शिकायत के अनुसार, तेजस का आरोप है कि प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए आरएसएस पर गैरकानूनी, असामाजिक और आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिससे संगठन की छवि धूमिल हुई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि दिनेश गुंडू राव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरएसएस की गतिविधियों, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली पर कथित रूप से झूठे और मानहानिकारक सवाल उठाए थे।

निचली अदालत द्वारा दिनेश गुंडू राव को राहत देने का आधार

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ट्रायल कोर्ट के समक्ष दिनेश गुंडू राव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट किसी व्यक्ति विशेष या शिकायतकर्ता को निशाना बनाकर नहीं किए गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि ये टिप्पणियां प्रियांक खरगे और उनके परिवार को मिली जान से मारने की धमकियों की निंदा करने के लिए की गई थीं। राव के अनुसार, उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी।

ट्रायल कोर्ट ने राव के इन तर्कों को स्वीकार किया था। कोर्ट का कहना था कि राव की टिप्पणियां किसी खास घटना पर केवल एक त्वरित प्रतिक्रिया थीं, न कि आरएसएस या उसके सदस्यों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का कोई जानबूझकर किया गया प्रयास।

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अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शिकायत में ऐसा कोई विशिष्ट आरोप या दावा नहीं है जो सीधे शिकायतकर्ता व्यक्तिगत रूप से या किसी निश्चित और स्पष्ट रूप से पहचाने जाने वाले समूह को लक्षित करता हो। इस वजह से आपराधिक मानहानि के बुनियादी कानूनी तत्व यहां पूरे नहीं होते हैं। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि ऐसी परिस्थिति में दिनेश गुंडू राव के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

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