गुरुग्राम: अगर आप भी वीकेंड पर दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने जा रहे हैं, तो अपने बिल को ध्यान से जरूर देखें। गुरुग्राम (गुड़गांव) के सेक्टर 29 स्थित एक मशहूर रेस्टोरेंट को ग्राहक से जबरन सर्विस चार्ज वसूलना और बिना बताए बीयर टेस्टर के पैसे जोड़ना बेहद महंगा पड़ गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने रेस्टोरेंट की इस मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल वसूला गया पैसा ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है, बल्कि ग्राहक को मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
उपभोक्ता अदालत ने बिग पिचर (Big Pitcher) रेस्टोरेंट को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को ₹15,000 का मुआवजा और ₹11,000 कानूनी खर्च के रूप में भुगतान करे। इसके साथ ही अवैध रूप से लिया गया सर्विस चार्ज भी ब्याज समेत लौटाना होगा।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 15 मई 2024 का है, जब शिकायतकर्ता अपने दोस्तों के साथ गुरुग्राम के सेक्टर 29 में स्थित ट्रिलियम एवेन्यू के ‘बिग पिचर’ आउटलेट पर गए थे। वे वहां एक पारदर्शी और बेहतरीन डाइनिंग एक्सपीरियंस की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन बिल आते ही उनके होश उड़ गए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कुल ₹1,236 का यह बिल किसी ‘पंकज’ नाम के व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया था, जिसे शिकायतकर्ता या उनके दोस्त जानते तक नहीं थे।
जब बिल की बारीकी से जांच की गई, तो उसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं:
- बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के ग्राहकों से सीधे 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज वसूला गया था।
- यह सर्विस चार्ज उस बिल पर लगाया गया था जिसमें एक ‘बीयर टेस्टर’ की कीमत भी जोड़ी गई थी। रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने पहले यह बिल्कुल नहीं बताया था कि इस बीयर टेस्टर के लिए अलग से पैसे देने होंगे।
ग्राहक ने मौके पर ही इस अनुचित बिलिंग का विरोध किया और रेस्टोरेंट प्रबंधन को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के नियमों का हवाला दिया। इसके बावजूद रेस्टोरेंट प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा रहा और बिल में सुधार करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित ग्राहक ने न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता आयोग की कड़ी फटकार और फैसला
संदीप जिंदल (पीठासीन सदस्य), ज्योति सिवाच और खुशविंदर कौर की सदस्यता वाली उपभोक्ता आयोग की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रेस्टोरेंट के इस रवैये की कड़ी निंदा की।
आयोग ने स्पष्ट किया कि रेस्टोरेंट की यह हरकत न केवल सेवा में बड़ी कमी को दर्शाती है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक अनुचित व्यापारिक गतिविधि (Unfair Trade Practice) भी है। कोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 18(2)(1) के तहत जारी किए गए राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का सरेआम उल्लंघन है।
क्या कहते हैं सरकारी नियम?
सुनवाई के दौरान आयोग ने 4 जुलाई 2022 को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा जारी किए गए नियमों का विशेष उल्लेख किया।
- इन नियमों के तहत देश के किसी भी रेस्टोरेंट या होटल को ग्राहकों से मेन्यू कार्ड पर लिखी कीमतों और लागू सरकारी टैक्स के अलावा कुछ भी अतिरिक्त वसूलने का अधिकार नहीं है।
- बिल में ऑटोमेटिक तरीके से सर्विस चार्ज जोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
रेस्टोरेंट पर लगा कुल कितना जुर्माना?
आयोग ने रेस्टोरेंट को दोषी पाते हुए ग्राहक की शिकायत को स्वीकार किया और निम्नलिखित दंड निर्धारित किए:
- सर्विस चार्ज की वापसी: ₹1,236 के बिल पर वसूला गया 10% सर्विस चार्ज ब्याज सहित ग्राहक को लौटाना होगा।
- मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना: ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और परेशानी के लिए ₹15,000 का मुआवजा देना होगा।
- मुकदमेबाजी का खर्च: शिकायतकर्ता को कानूनी लड़ाई लड़ने में आए खर्च के रूप में ₹11,000 का भुगतान करना होगा।

