कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता अभिषेक बनर्जी की आंख के इलाज के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट का यह आदेश बनर्जी द्वारा राज्य संचालित एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के समक्ष जांच के लिए पेश होने से इनकार करने के बाद आया है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने टीएमसी नेता को 6 अगस्त को अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होने के लिए कहा था। कोर्ट का उद्देश्य विशेषज्ञों से यह राय लेना था कि क्या बनर्जी की चिकित्सा स्थिति के लिए विदेश जाना आवश्यक है या उनका इलाज भारत में ही संभव है।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने टिप्पणी की कि इस समय प्राथमिक चिंता याचिकाकर्ता का उचित इलाज है, और यह इलाज कहां किया जाता है, वह बात द्वितीयक है। चूंकि बनर्जी ने स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए मेडिकल बोर्ड के पास जाने से मना कर दिया, इसलिए अदालत ने उनकी यात्रा की अर्जी निरस्त कर दी।
आपराधिक मामला और यात्रा प्रतिबंध
अभिषेक बनर्जी पर यह यात्रा प्रतिबंध एक आपराधिक मामले में मिली अंतरिम राहत की शर्तों के तहत लागू है। उस आदेश में कहा गया था कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकते।
बनर्जी ने इस शर्त को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 3 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि उनकी विदेश यात्रा से जुड़ी याचिका का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए।
अदालत में कानूनी दलीलें
याचिका का विरोध करते हुए राज्य के अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया कि ऐसी कोई आपातकालीन चिकित्सा स्थिति नहीं है जिसके लिए विदेश जाना अनिवार्य हो। मजूमदार ने कहा कि बनर्जी के खिलाफ कई प्राथमिकियां (FIR) दर्ज हैं और कई आपराधिक मामलों की जांच जारी है, इसलिए इन जांचों के सिलसिले में उनकी देश में उपस्थिति आवश्यक है।
दूसरी ओर, बनर्जी का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जॉन ने दलील दी कि किसी भी मरीज को अपनी पसंद के डॉक्टर और चिकित्सा संस्थान का चयन करने का अधिकार है, विशेष रूप से तब जब इलाज की निरंतरता बनाए रखने की बात शामिल हो।

