अचानक बदला बोर्डिंग पॉइंट: ऑनलाइन टिकट पोर्टल और बस ऑपरेटर पर 50 हजार रुपये का जुर्माना

आंध्र प्रदेश उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बस का बोर्डिंग स्थान अंतिम समय पर बदलने और यात्री को छोड़े बिना बस रवाना करने के मामले में एक ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म और निजी बस ऑपरेटर पर सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने दोनों पक्षों को सेवा में कमी और यात्री को हुई मानसिक प्रताड़ना का दोषी पाते हुए पीड़ित को 20,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, दोनों संस्थाओं को संयुक्त रूप से 30,000 रुपये की राशि आंध्र प्रदेश राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने के आदेश दिए गए हैं।

अचानक बदला बोर्डिंग स्थान, छूट गई बस

यह पूरा मामला 9 जनवरी 2025 की यात्रा से जुड़ा है। एक यात्री ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बेंगलुरु से ओंगोल जाने के लिए 1,249.50 रुपये का भुगतान कर बस टिकट बुक किया था। यात्रा की शाम को यात्री के पास एक फोन कॉल आया, जिसमें सूचित किया गया कि पिक-अप स्थान आनंदा राव सर्किल से बदलकर टिन फैक्टरी कर दिया गया है।

निर्देश मिलने के बाद यात्री नए बोर्डिंग पॉइंट के लिए रवाना हुआ, जहां पहुंचने में उसे लगभग 45 मिनट का समय लगा। हालांकि, जब तक वह नए स्थान पर पहुंचा, तब तक बस रवाना हो चुकी थी। इसके कुछ ही समय बाद, यात्री को संदेश मिला कि ऑपरेटर ने बस रद्द कर दी है और टिकट का किराया वापस किया जा रहा है। अचानक बस छूट जाने के कारण यात्री को ओंगोल पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा, जिसमें उसे लगभग 3,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। इस परेशानी के बाद पीड़ित ने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

डिजिटल मध्यस्थ बताकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते: आयोग

READ ALSO  क्या परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले शस्त्र लाइसेंस रद्द करने का आधार हो सकता है?

मामले की सुनवाई के दौरान ऑनलाइन टिकट प्लेटफॉर्म ने दलील दी कि वह केवल एक डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म संचालित करता है और बस संचालन से जुड़े फैसलों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। प्लेटफॉर्म का तर्क था कि यात्री को नए स्थान की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन वह समय पर नहीं पहुंच सका। साथ ही, टिकट की राशि भी लौटा दी गई थी।

अध्यक्ष डी. श्रीदेवी, सदस्य वाई. सुंदर राव और डॉ. एस.ए. समीर की पीठ ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि केवल टिकट की रकम वापस कर देने से दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाते, क्योंकि यात्री को दूर स्थित नए बोर्डिंग स्थान तक जाने में काफी परेशानी और वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा। आयोग ने यह भी पाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने यात्री से कोई पुष्टि किए बिना केवल ऑपरेटर की सूचना के आधार पर टिकट रद्द कर दिया, जो उसकी सीधी लापरवाही को दर्शाता है।

पीठ ने अपने निर्णय में रेखांकित किया कि जब उपभोक्ताओं को खराब सेवाओं या व्यवधान का सामना करना पड़ता है, तो डिजिटल एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म खुद को महज एक मध्यस्थ बताकर अपनी कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से दोषी मानते हुए पीड़ित को सेवा में कमी, प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में 20,000 रुपये तथा राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में 30,000 रुपये जमा करने के निर्देश दिए।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता को नौकरी देने से इनकार करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की आलोचना की
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles