राजस्थान हाईकोर्ट ने ब्यावर-मसूदा-गोयला स्टेट हाईवे पर स्थित एक कथित अवैध टोल प्लाजा से वसूले गए राजस्व का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर छायादार पेड़ लगाने के लिए करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित को ध्यान में रखते हुए यह राशि पौधारोपण पर खर्च की जाएगी।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने 3 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए प्रोजेक्ट डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वे टोल प्लाजा को नगर पालिका सीमा से दूर स्थानांतरित करने से जुड़ी याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद तीन महीने के भीतर फैसला लें। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर इस पर निर्णय नहीं लिया गया, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्यवाही शुरू की जाएगी।
टोल वसूली का रिकॉर्ड और पौधारोपण की अनिवार्यता
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, प्रशासन को उक्त टोल प्लाजा पर अब तक एकत्र किए गए पूरे फंड का ब्योरा सुरक्षित रखना होगा और इसे प्रोजेक्ट डायरेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद प्रोजेक्ट डायरेक्टर इस राशि का उपयोग सार्वजनिक क्षेत्रों में छायादार पौधे लगाने और उनकी देखभाल के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करने में करेंगे।
आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने यह भी अनिवार्य किया है कि नए लगाए गए पौधों की तस्वीरें और उनकी देखभाल करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का शपथ पत्र (अंडरटेकिंग) हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
नियमों के उल्लंघन का आरोप और पुराना आदेश
यह मामला दो स्थानीय निवासियों द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राजस्थान स्टेट हाईवेज फी (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) रूल्स, 2015 के नियम 8 के तहत नगर पालिका या किसी स्थानीय शहर की सीमा के दो किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा स्थापित करने पर रोक है। इसके बावजूद यह टोल प्लाजा लगातार संचालित होता रहा, जिसे याचिकाकर्ताओं ने नियम विरुद्ध और अवैध बताया।
इससे पहले हाईकोर्ट के एक निर्देश के बाद ब्यावर के जिला कलेक्टर ने 27 फरवरी 2026 को टोल प्लाजा को नगर पालिका सीमा से पांच किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। हालांकि, उस आदेश को किसी भी पक्ष ने चुनौती नहीं दी और वह अंतिम रूप ले चुका था, लेकिन फिर भी उस पर अमल नहीं किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर के फैसले को लागू कराने के लिए 21 मई 2026 को प्रोजेक्ट डायरेक्टर को आवेदन सौंपा था।
पर्यावरण और भावी पीढ़ियों का हित
अदालत ने टोल की राशि को पौधारोपण में लगाने का निर्देश देते हुए कहा कि पेड़ लगाने से समाज और स्थानीय समुदाय को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। जस्टिस ढंड ने टिप्पणी की कि लंबे समय तक जीवित रहने वाले ये वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, ताजा और ऑक्सीजन से भरपूर वातावरण तैयार करेंगे।

