दिल्ली से रायपुर की उड़ान के टर्मिनल की सही जानकारी न देने के कारण एक यात्री की फ्लाइट छूटने के मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने निजी एयरलाइन पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने एयरलाइन को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया, जिसके कारण यात्री को अपने परिवार के साथ पूरी रात हवाई अड्डे पर बितानी पड़ी थी और अगले दिन महंगे टिकट खरीदने पड़े थे।
मुआवजे और कानूनी खर्च के भुगतान का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य निरुपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने 21 जुलाई को अपना निर्णय सुनाया। आयोग ने एयरलाइन को पीड़ित यात्री को 50,000 रुपये क्षतिपूर्ति, मानसिक प्रताड़ना के लिए 5,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
फ्लाइट के समय में बदलाव पर टर्मिनल का जिक्र नहीं
यह मामला 31 मार्च 2015 का है, जब पीड़ित यात्री ने अपने परिवार के साथ दिल्ली से रायपुर यात्रा के लिए 13,161 रुपये में टिकट बुक कराए थे। यात्रा से पहले एयरलाइन ने एसएमएस भेजकर जानकारी दी कि फ्लाइट का समय 15 मिनट पहले कर दिया गया है और अब उड़ान शाम 5:50 बजे की बजाय 5:35 बजे रवाना होगी। हालांकि, इस संदेश या टिकट पर यह दर्ज नहीं था कि उड़ान किस टर्मिनल से संचालित होगी।
यात्री की दिल्ली आने वाली फ्लाइट टर्मिनल 3 पर उतरी थी, इसलिए उन्होंने माना कि वापसी की उड़ान भी इसी टर्मिनल से होगी। वह निर्धारित समय से एक घंटे पहले टर्मिनल 3 पर पहुंच गए, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि फ्लाइट 7.5 किलोमीटर दूर स्थित टर्मिनल 1D से रवाना होने वाली है।
चेक-इन का समय समाप्त होने से छूटी फ्लाइट
टर्मिनल 1D पहुंचने से पहले ही बोर्डिंग काउंटर बंद होने की 45 मिनट की समय-सीमा खत्म हो चुकी थी। इस वजह से परिवार उड़ान में सवार नहीं हो सका और उन्हें पूरी रात दिल्ली एयरपोर्ट पर गुजारनी पड़ी। अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए यात्री को अगले दिन 21,135 रुपये खर्च करके नए टिकट खरीदने पड़े।
जब एयरलाइन ने कानूनी नोटिस का जवाब नकार दिया, तो यात्री ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग की कार्यवाही के दौरान एयरलाइन या उसकी बुकिंग एजेंसी की तरफ से कोई हलफनामा, साक्ष्य या कानूनी प्रतिनिधि पेश नहीं किया गया।
सीसीटीवी फुटेज देने में नाकाम रही एयरलाइन
एयरलाइन ने कानूनी नोटिस के अपने शुरुआती जवाब में तर्क दिया था कि यात्री शाम 4:49 बजे चेक-इन के लिए पहुंचा था, जबकि 5:35 बजे की उड़ान के लिए 45 मिनट पहले का समय अनिवार्य था। हालांकि, आयोग ने ध्यान दिया कि यात्री ने सही समय पर पहुंचने का प्रमाण देने के लिए टर्मिनल 3 का सीसीटीवी फुटेज मांगा था, जिसे एयरलाइन पेश नहीं कर सकी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब एयरलाइन फ्लाइट के समय में बदलाव करती है, तो परिचालन से जुड़ी पूरी जानकारी देना उसकी जिम्मेदारी है। अधूरी जानकारी के कारण यात्री सही समय पर गेट तक नहीं पहुंच सका, इसलिए इस लापरवाही से हुए आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी की सीधी जवाबदेही एयरलाइन की है।

