सुप्रीम कोर्ट पहुँची 94 वर्षीय वृद्धा, 45 साल पहले लगे इमरजेंसी को असंवैधानिक घोषित करने की मांग

भारत में 45 वर्ष पहले लगे आपातकाल को लेकर 94 वर्षीय वृद्ध महिला ने सुप्रीम कोर्ट से असंवैधानिक घोषित करने के साथ साथ 25 करोड़ धनराशि से उसकी भरपाई करने की मांग की है। महिला ने बताया है कि 1975 में लगे आपातकाल के दौरान उनके पति के बेशुमार दौलत को लूट लिया गया था। जिसमे बेशकीमती रत्न भी शामिल थे।

दुकान पर हुई थी छापेमारी-

जून 1975 में इमरजेंसी घोषित होने के फौरन बाद ,सीमा शुल्क अधिनियम के संदिग्ध उलंघन पर सरीन के व्यावसायिक परिसरों में छापेमारी करके बेशकीमती समान,आभूषण और कलाकृतियों को जब्त कर ली गई।

याचिकाकर्ता महिला के पति को विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निरोधक अधिनियम के तहत हिरासत में रखा गया था। अधिकारियों द्वारा बार बार एक ही बात को सुना गया था। की वह अपनी सभी चल अचल संपत्ति को छोड़कर देश छोड़ दें। उसके बाद याचिकाकर्ता और उसके बच्चे विदेश चले गए। क्योंकि उनका अधिकांश माल और सम्पति जब्त कर ली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में बीते चार दशक से अधिक वक्त से महिला और और उसके बच्चों के हुए नुकसान के भरपाई की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के सामने अभी भी सुनवाई के लिए याचिका दाखिल हो रही है।

महिला मौजूदा समय मे अपनी बेटी के साथ देहरादून में रह रही है। वर्ष 1957 में महिला ने एच के सरीन से विवाह किया था। पति का करोल बाग और कनॉट प्लेस में उत्कर्ष कला और रत्नों का व्यवसाय था।

होम मिनिस्ट्री को भी बनाया पक्षकार-

सितबर 2020 को वीरा सरीन द्वारा दायर याचिका में गृहमंत्रालय को भी एक पक्षकार बनाया गया है।

महिला द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि याची को अलोकतांत्रिक दुःस्वप्न सामाप्ति की इच्छा है जिसे आपातकाल कहा जाता है। यह केवल सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक स्वीकृति और घोषणा द्वारा ही सम्भव है। याचिका में आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।

ब्लैक डे-

 याचिका में कहा गया है कि ” इस असंवैधानिक अन्याय का असर उनके फैमिली पर लगभग तीन पीढ़ियों पर पड़ा है। इस आपातकाल ने ऐसी परिस्थिति पैदा कर दी जिसमे रिश्तेदारों और दोस्तों ने भी साथ छोड़ दिया। महिला आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करवा कर शांति चाहती है।

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