Allahabad HC ने गौ मांस बेचने के आरोपी व्यक्ति को 35 हजार रुपये जमा करने की शर्त पर जमानत दी

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने गौमांस बेचने के आरोपी युवक को इस शर्त पर जमानत दी है कि वह गौ सेवा आयोग यूपी के खाते में 35 हजार रुपये रिहाई के चार सप्ताह के भीतर जमा करेगा और गौ सेवा आयोग 35 हजार जमा की रशीद कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। ट्रायल कोर्ट के समक्ष जमा की रसीद प्रस्तुत करने में विफलता के मद्देनजर उसकी जमानत को स्वचालित रूप से रदद कर दिया जाएगा। और उसे हिरासत में ले लिया जाएगा।

यह फैसला जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने धारा 439 सीआरपीसी के तहत दायर अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। व्यक्ति पर यह आरोप लगाया गया है कि आरोपी आवेदक और उसके भाई आमिर के पास से गाय संतान के शारीरिक अंगों के साथ 4 कुन्तल गौमांस बरामद किया गया था।

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अभियुक्त आवेदक के पक्षकार अधिवक्ता ने कोर्ट में यह उल्लेख किया है की आमिर को किशोर होने के लिए निर्धारित किया गया था। और अपील में सेशन कोर्ट ने उसे जमानत दे दी है आरोपी आवेदक को झूठा करार दिया गया है। अभियुक्त आवेदक और भाई गौ मांस बेचने के व्यापार में नही है और वह यह भी स्वीकार करता है कि वसुली का कोई सार्वजनिक गवाह नही है। और यहाँ तक कि ऑर्चर्ड के मालिक का बयान जहां आरोपी आवेदक के कब्जे से कथित तौर पर वसूली की गई थी। जिसे दर्ज नही किया गया।

दूसरी और एजीए ने जमानत के लिए दायर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी आवेदक के पास से 400 किलोग्राम मांस को बरामदगी को झूठी वसूली नही कहा जा सकता है। आरोपी आवेदक के कब्जे गाय के पूर्वजों के शारीरिक अंग भी बरामद हुए हैं।

कोर्ट का निर्णय-

कोर्ट ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि आरोपी आवेदक 1 सिंतबर 2020 से जेल में है और उसके ऊपर इसके आलवा कोई आपराधिक मामला दर्ज नही है। उसका भाई जो नाबालिक बताया गया था। उसे सेशन कोर्ट पहले ही जमानत पर रिहा कर चुकी है।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी आवेदक को शर्तों के साथ जमानत का हक़दार है।

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