पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से बड़ी राहत: एक सप्ताह की मिली अंतरिम सुरक्षा

तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को असम पुलिस द्वारा दर्ज किए गए एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल (अग्रिम जमानत) प्रदान की है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की संपत्ति और दस्तावेजों से जुड़े खेड़ा के आरोपों के बाद दर्ज किया गया था।

जस्टिस सुजाता कलसीकम ने खेड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सात दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में नियमित राहत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा, “याचिकाकर्ता को संबंधित अदालत के समक्ष आवेदन दायर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाता है। याचिकाकर्ता को शर्तों के साथ एक सप्ताह के लिए राहत दी जाती है।”

कानूनी विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई थी, जिसमें पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्तियां हैं। खेड़ा का दावा था कि इन संपत्तियों का विवरण मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के चुनावी हलफनामे में नहीं दिया गया था।

इन आरोपों के जवाब में गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। इस प्राथमिकी (FIR) में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं शामिल हैं:

  • धारा 175: चुनाव के संबंध में झूठा बयान देना।
  • धारा 318: धोखाधड़ी (चीटिंग)।
  • धारा 35: शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा के अधिकार से संबंधित।
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शुक्रवार के अदालती आदेश से पहले ही जांच में सक्रियता देखी गई थी, जब असम पुलिस की एक टीम पूछताछ के लिए खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची थी। इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ “निराधार” आरोप लगाने से पहले दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया।

इससे पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि भले ही खेड़ा हैदराबाद चले गए हों, लेकिन असम पुलिस जांच के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें “पाताल” से भी ढूंढ निकालेगी।

अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद खेड़ा के पास सात दिनों का समय है ताकि वह असम की संबंधित अदालत या अन्य उचित फोरम से कानूनी राहत ले सकें। इस अवधि के दौरान पुलिस उन्हें हिरासत में नहीं ले सकेगी।

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