नोएडा विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों के बीच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि नोएडा में पिछले महीने हुए मजदूरों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार आदित्य आनंद और रूपेश रॉय न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे। अदालत का यह फैसला दोनों आरोपियों द्वारा पुलिस हिरासत में गंभीर शारीरिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार के लगाए गए आरोपों के बाद आया है।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक दोनों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। इसके साथ ही पीठ ने यह भी साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले की वजह से जांचकर्ताओं या आरोपियों के लिए कानून के दायरे में उपलब्ध अन्य कानूनी विकल्प तलाशने का रास्ता बंद नहीं होगा।

पुलिस प्रताड़ना के आरोप और वकीलों को रोकने का दावा

आदित्य के भाई केशव द्वारा 15 मई को दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को दोनों आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट में पेशी के दौरान दोनों न्यायाधीशों ने आदित्य और रूपेश से सीधे बातचीत की, जिसमें दोनों ने पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ हुए दुर्व्यवहार और प्रताड़ना की पुष्टि की।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने अदालत के सामने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने जबरन ‘फर्जी बरामदगी’ (fake recoveries) दिखाने के लिए आरोपियों को बेरहमी से टॉर्चर किया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों से मिलने पहुंचे उनके वकीलों को पुलिस द्वारा बलपूर्वक रोक दिया गया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बचाव पक्ष ने अदालत से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ही रखने की गुहार लगाई और इस पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के. एम. नटराज ने मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार किया। उन्होंने अदालत में कहा कि कानून के समक्ष आरोपी के साथ भी गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए।

दोनों आरोपियों की शारीरिक स्थिति देखने और उनसे बातचीत करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संतोष व्यक्त किया और उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में रखने की मंजूरी दे दी। हालांकि, पीठ ने मौखिक तौर पर स्पष्ट किया कि पुलिस के पास न्यायिक हिरासत के दौरान भी आरोपियों से पूछताछ करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

सत्यम वर्मा को अंतरिम राहत से इनकार

इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा से जुड़े एक अन्य मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने सत्यम वर्मा की प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक निरोध) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। वर्मा को 13 अप्रैल को हुई हिंसा के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था।

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अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान सत्यम वर्मा को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। पीठ को यह भी सूचित किया गया कि वर्मा की गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने वाली एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पहले से ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है।

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