एंटीलिया बम कांड: सचिन वाझे की डिस्चार्ज अर्जी का NIA ने किया विरोध, कहा- ‘आतंकी साजिश में सीधे तौर पर शामिल थे पूर्व पुलिसकर्मी’

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एंटीलिया बम कांड और व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की डिस्चार्ज (आरोपमुक्त करने की) अर्जी का कड़ा विरोध किया है। विशेष कोर्ट में दाखिल अपने 145 पन्नों के विस्तृत जवाब में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि वाझे इस अपराध को अंजाम देने में “सीधे तौर पर शामिल” थे और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) पुख्ता मामला बनता है।

यह मामला 25 फरवरी, 2021 का है, जब दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ के पास विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी मिली थी। इसके कुछ दिनों बाद, 5 मार्च 2021 को उस वाहन के मालिक व्यवसायी मनसुख हिरेन का शव ठाणे की एक खाड़ी में मिला। इस साजिश में कथित भूमिका के लिए मुंबई पुलिस के तत्कालीन अधिकारी सचिन वाझे को मार्च 2021 में गिरफ्तार किया गया था और वे तब से न्यायिक हिरासत में हैं।

अपनी डिस्चार्ज अर्जी में वाझे ने तर्क दिया है कि उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही कानून की नजर में “शून्य” (null and void) है क्योंकि इसमें अधिकार क्षेत्र का अभाव है। उनका दावा है कि उन पर एनआईए एक्ट को “मनमाने ढंग से” लगाया गया है और अपराध की गंभीरता को लेकर जांच एजेंसी के पास कोई ठोस आधार नहीं है। वाझे ने विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत मुकदमा चलाने के लिए जरूरी मंजूरी (sanction) की कमी को आधार बनाया है।

वाझे की दलीलों को खारिज करते हुए, एनआईए ने कहा कि आरोपी द्वारा उठाए गए आधार “तार्किक या वैध” नहीं हैं और इनमें कोई मेरिट नहीं है। एजेंसी ने जोर देकर कहा कि इस “बड़ी साजिश” के तहत किए गए अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं।

NIA ने अपने जवाब में स्पष्ट किया:

“वाझे ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर आतंकी कृत्य करने की साजिश, आतंकी कृत्य को अंजाम देने, आतंकी गिरोह की सदस्यता, हत्या के लिए अपहरण, मनसुख हिरेन की हत्या और सबूतों को नष्ट करने जैसे दंडनीय अपराध किए हैं।”

जांच एजेंसी ने आगे कहा कि जांच के तथ्यों और परिस्थितियों से यह “पूरी तरह स्पष्ट” है कि पूर्व पुलिसकर्मी ने इन अपराधों को अंजाम देने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। NIA ने कोर्ट से आग्रह किया कि वह आरोपी द्वारा उठाई गई तकनीकी बारीकियों के बजाय अपराध की “गंभीरता” पर ध्यान दे।

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NIA ने अदालत से वाझे की अर्जी को जुर्माने के साथ खारिज करने और “न्याय के हित में” उनके तथा अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। अब कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा कि क्या वाझे के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून की सख्त धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।

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