तेल की बढ़ती कीमतों के बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट की अनूठी पहल: कार छोड़ साइकिल और पैदल दफ्तर पहुंचे जज और कर्मचारी

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आए अचानक ₹3 के उछाल के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक बड़ी मिसाल पेश की है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में हाईकोर्ट में ‘नो व्हीकल डे’ मनाया गया। इस दौरान अदालत के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी गाड़ियों को घर पर छोड़कर साइकिल और पैदल चलकर दफ्तर पहुंचने का फैसला किया।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर भारत के आम आदमी की जेब पर पड़ा है।

‘नो व्हीकल डे’: एक न्यायिक संदेश

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने इस पहल के जरिए समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और ईंधन बचाने का संदेश दिया। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट भी अपना योगदान देना चाहता है। हमने सभी कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि वे साइकिल या पैदल चलकर दफ्तर आएं। यह अभी केवल एक आह्वान है, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि ईंधन बचाने के लिए इसे ज्यादा से ज्यादा अपनाया जाए।”

सड़क पर उतरने के अलावा, हाईकोर्ट अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दे रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि वर्चुअल सुनवाई और बैठकों को और अधिक प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि अनावश्यक यात्राओं को कम किया जा सके और तेल की खपत पर लगाम लगे।

₹3 की बढ़ोतरी: घरेलू अर्थव्यवस्था पर चोट

हाईकोर्ट का यह फैसला शुक्रवार को देश भर में ईंधन की कीमतों में हुई ₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी के तुरंत बाद आया है। इस बढ़ोतरी के साथ ही राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.77 से बढ़कर ₹97.77 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल ₹87.67 से बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। कीमतों में इस उछाल ने माल ढुलाई और दैनिक यात्रियों पर सीधा दबाव डाला है।

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वैश्विक संकट और ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ का प्रभाव

ईंधन की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे गहरा वैश्विक ऊर्जा संकट है। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है—वहां जारी रुकावटों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

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सरकार का रुख: “घबराने की जरूरत नहीं”

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल और घरेलू कीमतों में वृद्धि के बावजूद, केंद्र सरकार ने जनता को भरोसा दिलाया है। शुक्रवार को अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त ईंधन भंडार है और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई तत्काल कमी नहीं है।

दुनिया भर में जारी तनाव के बीच, उत्तराखंड हाईकोर्ट का ‘नो व्हीकल डे’ एक वैश्विक संकट के खिलाफ स्थानीय और प्रेरणादायक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

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