NEET-PG कट-ऑफ में कमी: 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी काउंसलिंग के पात्र, NBEMS ने सुप्रीम कोर्ट से कहा—निर्णय हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं

नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल कम किए जाने के बाद 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी काउंसलिंग के पात्र हो गए हैं। बोर्ड ने कहा कि इस चरण पर किसी भी प्रकार का न्यायिक हस्तक्षेप इन अभ्यर्थियों को सीधे प्रभावित करेगा।

यह मामला न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष लंबित है, जो NEET-PG 2025-26 के लिए कट-ऑफ में की गई भारी कमी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में NBEMS ने कहा:

“कट-ऑफ कम किए जाने के परिणामस्वरूप 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी NEET-PG 2025 की काउंसलिंग में भाग लेने के पात्र हो गए हैं।”

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि कट-ऑफ घटाने के निर्णय में उसकी कोई भूमिका नहीं है और यह विषय डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है।

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देशभर में 18,000 से अधिक पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली रहने के बाद कट-ऑफ पर्सेंटाइल में संशोधन किया गया।

संशोधित मानदंड के अनुसार:

  • सामान्य वर्ग का कट-ऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल किया गया
  • आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ 40 पर्सेंटाइल से घटाकर 0 पर्सेंटाइल किया गया

इससे बहुत कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी, यहाँ तक कि –40/800 तक अंक पाने वाले भी, काउंसलिंग के तीसरे राउंड में भाग ले सकते हैं।

यह याचिका हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कट-ऑफ में इतनी बड़ी कमी अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।

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पीठ ने 4 फरवरी को केंद्र सरकार, NBEMS, NMC और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

NBEMS ने कहा है कि संशोधित कट-ऑफ के आधार पर पात्र हुए अभ्यर्थियों को देखते हुए इस चरण पर प्रक्रिया में कोई बदलाव करना उन्हें प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।

मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

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