उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले में एक लाइसेंसी शराब की दुकान के बाहर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के मामले में जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश एक स्थानीय व्यवसायी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें व्यापार में बाधा और सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं।
यह मामला स्थानीय व्यवसायी सुरेश चंद्र उप्रेती द्वारा दायर किया गया था। याचिकाकर्ता के पास ‘इंडियन मेड फॉरन लिकर’ (IMFL) की खुदरा बिक्री का वैध लाइसेंस है। उप्रेती ने कोर्ट को बताया कि कुछ लोग उनकी दुकान के ठीक बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे न केवल उनके व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि वहां किसी भी अप्रिय घटना की संभावना भी बनी हुई है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि वह सरकार द्वारा जारी वैध लाइसेंस के तहत अपना व्यवसाय कर रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस संबंध में पहले जिला मजिस्ट्रेट को भी प्रतिवेदन दिया था, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन सक्रिय है। कोर्ट को बताया गया कि मौके पर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान की जा रही है ताकि किसी भी तरह की प्रतिकूल स्थिति या हिंसा को रोका जा सके।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने जोर दिया कि पुलिस सुरक्षा के बावजूद प्रदर्शनों के कारण उनका व्यापार सामान्य रूप से नहीं चल पा रहा है और इस पर एक ठोस प्रशासनिक निर्णय की आवश्यकता है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर कानून के अनुसार विचार करें और तीन सप्ताह के भीतर उचित निर्णय लें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वैध लाइसेंस धारकों के अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच उचित संतुलन बना रहे।

