बुकिंग के बावजूद परिवार को लौटाया: मनाली के रिसॉर्ट पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया 31 हजार रुपये का जुर्माना

गुरुग्राम के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मनाली स्थित ‘द एलायोर ग्रैंड रिसॉर्ट’ को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए पीड़ित पर्यटक को 31,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल और सदस्य ज्योति सिवाच तथा खुशविंदर कौर की पीठ ने 13 जुलाई को यह आदेश सुनाया। उपभोक्ता फोरम ने हिमाचल प्रदेश के इस रिसॉर्ट को मानसिक प्रताड़ना और कष्ट के लिए 20,000 रुपये का मुआवजा तथा कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में 11,000 रुपये देने का निर्देश दिया। रिसॉर्ट प्रबंधन को इस राशि का भुगतान करने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है, जिसके बाद भुगतान होने तक 12 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज लागू होगा।

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पुराने समझौते के तहत कराई गई थी बुकिंग

यह विवाद दोनों पक्षों के बीच 15 मार्च 2021 को हुए एक पुराने कानूनी समझौते के उल्लंघन से उपजा है। उस समझौते के तहत रिसॉर्ट ने पीड़ित ग्राहक को 40 प्रतिशत छूट पर चार रातों के लिए कमरा देने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसी आश्वासन के आधार पर गुरुग्राम निवासी व्यक्ति ने 5 से 9 अक्टूबर 2021 तक के लिए अपने चार सदस्यीय परिवार (दो वयस्क और दो बच्चे) के लिए कमरा बुक किया था। रिसॉर्ट की नीति के अनुसार 30,400 रुपये के कुल किराए में से 10,000 रुपये का अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया था।

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लंबी यात्रा के बाद परिवार को बेसहारा छोड़ा

जब पीड़ित परिवार 5 अक्टूबर 2021 को गुरुग्राम से लंबी यात्रा तय करके मनाली पहुंचा, तो होटल कर्मचारियों ने उन्हें ठहराने से मना कर दिया और 10,000 रुपये की अग्रिम राशि वापस लौटा दी। परिवार के अचानक बेसहारा हो जाने पर ग्राहक ने कर्मचारियों से वैकल्पिक रहने की व्यवस्था कराने में मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पीड़ित ने रिसॉर्ट को कानूनी नोटिस भेजा और सेवा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

होटल का तर्क खारिज, आयोग की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान रिसॉर्ट ने अपना बचाव करते हुए तर्क दिया कि अग्रिम राशि लौटा दिए जाने के बाद शिकायत का समाधान हो चुका था और कर्मचारियों की यह जिम्मेदारी नहीं थी कि वे ग्राहक के लिए दूसरा होटल खोजें। आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एक लंबी यात्रा के बाद पहुंचे पर्यटकों को कमरा न देना और सिर्फ पैसे लौटाकर पल्ला झाड़ लेना सेवा की लापरवाही को खत्म नहीं करता। आयोग ने पाया कि पूर्व समझौते का पालन न करके रिसॉर्ट ने ग्राहक को अनावश्यक परेशानी में डाला और बिना वजह मुकदमेबाजी के लिए मजबूर किया।

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