पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में सरकारी सर्किट हाउस से जबरन बाहर निकाले जाने के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से तुरंत राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग खारिज कर दी है।
कृष्णनगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने नादिया जिला प्रशासन के अधिकारियों पर कमरे का वैध आवंटन होने के बावजूद 14 अगस्त की देर रात सर्किट हाउस से जबरन बाहर निकालने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए याचिका दाखिल की थी।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। वकील ने कहा कि हाईकोर्ट पहले ही इस संबंध में सुरक्षात्मक आदेश दे चुका है। इसके अलावा, यह मामला एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे से जुड़ा है, इसलिए इसकी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। हालांकि, पीठ ने मामले की त्वरित सुनवाई की अर्जी स्वीकार नहीं की।
नादिया जिला प्रशासन पर देर रात परेशान करने का आरोप
संसद सत्र पूरा होने के बाद महुआ मोइत्रा अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णनगर के सरकारी सर्किट हाउस में रात गुजारने के लिए ठहरी थीं। मोइत्रा का कहना है कि सांसद होने के नाते वह वहां रुकने की हकदार थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कमरा बुक करते समय या चेक-इन करते वक्त किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने उन्हें किसी पाबंदी या रोक की जानकारी नहीं दी थी। इसके बावजूद आधी रात को प्रशासन ने उन पर परिसर खाली करने का दबाव बनाया, जिसका एकमात्र उद्देश्य उन्हें परेशान करना था।
लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत और सुरक्षा पर उठाए सवाल
सांसद के अनुसार, जब उन्होंने सर्किट हाउस खाली करने से मना कर दिया, तो परिसर के बाहर भीड़ जमा हो गई और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगी। उन्होंने इस घटनाक्रम पर गंभीर सुरक्षा चिंताएं व्यक्त की हैं। मोइत्रा ने कहा कि यह सर्किट हाउस अति-सुरक्षित क्षेत्र में स्थित है, जो जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के सरकारी बंगलों के ठीक सामने है। ऐसे में वहां इस तरह भीड़ का एकत्र होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
इस घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर नादिया जिला प्रशासन के रवैये की शिकायत की थी और संसदीय हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने इस मामले में विधिक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

