66 लाख रुपये की पूजा धोखाधड़ी: मद्रास हाईकोर्ट ने आरोपी महिला को दी जमानत, कहा – वित्तीय लाभ का कोई सबूत नहीं

मद्रास हाईकोर्ट ने 66 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार की गई एक महिला को जमानत दे दी है। जस्टिस के राजशेखर ने 6 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि महिला को इस कथित धोखाधड़ी से कोई वित्तीय लाभ हुआ है। कोर्ट के अनुसार, महिला की भूमिका केवल पीड़िता को एक ऐसे व्यक्ति से मिलवाने तक सीमित थी, जिसने आध्यात्मिक अनुष्ठानों के जरिए उसकी पारिवारिक समस्याओं को सुलझाने का दावा किया था।

धोखाधड़ी का पूरा मामला

यह मामला अपनी घरेलू समस्याओं से परेशान एक महिला की शिकायत से जुड़ा है। आरोपी महिला की सलाह पर पीड़िता ने एक स्वघोषित आध्यात्मिक विशेषज्ञ से संपर्क किया था। शिकायत के अनुसार, इस कथित विशेषज्ञ के कहने पर पीड़िता ने बैंक खातों के जरिए 66 लाख रुपये ट्रांसफर किए और सोने के गहने भी सौंप दिए। बाद में जब उसे ठगे जाने का अहसास हुआ, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद याचिकाकर्ता (आरोपी महिला) को गिरफ्तार कर लिया गया था।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

आरोपी महिला की ओर से पेश वकील आर आनंद और एस माइकल हेल्डन कुमार ने अदालत में दलील दी कि उनकी मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि वह 7 जून, 2026 से हिरासत में है और कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली सभी शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है। बचाव पक्ष ने जोर देकर कहा कि भले ही महिला को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया है, लेकिन शिकायतकर्ता और दूसरे आरोपी (कथित विशेषज्ञ) के बीच हुए किसी भी लेन-देन से उसे कोई फायदा नहीं पहुंचा है।

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दूसरी ओर, सरकारी वकील एन बालासुब्रमण्यम ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि इस मामले की जांच अभी चल रही है और शिकायतकर्ता से लिए गए 66 लाख रुपये तथा सोने के जेवर अभी बरामद नहीं किए जा सके हैं। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि हाल ही में गिरफ्तार हुई आरोपी महिला अगर जमानत पर बाहर आती है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी और जमानत की शर्तें

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केस डायरी की समीक्षा करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि पुलिस ने आरोपियों का बयान दर्ज किए बिना ही उन्हें गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया था। कोर्ट ने महिला को कोई वित्तीय लाभ न मिलने के तथ्य और उसके द्वारा जेल में बिताए गए समय को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर ली।

अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी महिला को तिरुनेलवेली के वल्लियूर में न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष 15,000 रुपये का मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने पर रिहा किया जाए। जमानत की शर्तों के मुताबिक, उसे तीन सप्ताह तक कामकाजी दिनों में रोजाना संबंधित अदालत के समक्ष पेश होना होगा और भविष्य में पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना होगा।

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जस्टिस राजशेखर ने सचेत किया कि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वह फरार होती है, तो पुलिस उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 269 के तहत नया मामला दर्ज कर सकती है, जो जमानत पर रिहा होने के बाद अदालत में उपस्थित न होने से संबंधित है।

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