इलाहाबाद हाईकोर्ट: दिव्यांगजनों के लिए सुगम पहुंच मौलिक अधिकार, यूपी में आवासीय परिसरों में अनिवार्य होंगी सुलभ पार्किंग और सुविधाएं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि आवासीय परिसरों में दिव्यांगजनों के लिए विशेष पार्किंग और सभी सामान्य सुविधाओं तक बिना बाधा पहुंच सुनिश्चित की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुगम्यता (Accessibility) दिव्यांग व्यक्तियों का मौलिक अधिकार है और इसे हर स्तर पर लागू करना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने 26 फरवरी को दिए अपने आदेश में कहा कि किसी भी भवन या संरचना में उपलब्ध साझा सुविधाओं तक दिव्यांगजनों की पहुंच सुनिश्चित करना संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है।

अदालत ने राज्य के सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि भवन निर्माण की अनुमति देते समय और पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने से पहले Accessibility Rules का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन नियमों का अनुपालन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि अनिवार्य शर्त होनी चाहिए।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि भवनों के नक्शों को मंजूरी देते समय ऐसी व्यवस्थाएं शामिल की जाएं, जिससे दिव्यांगजन किसी भी प्रकार से असमान स्थिति में न आएं। इसके तहत पार्किंग की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां से लिफ्ट तक सीधा और आसान पहुंच हो, साथ ही फुटपाथ, खेल मैदान, सामुदायिक केंद्र और जिम जैसी सुविधाओं तक भी सुगमता बनी रहे।

यह मामला M/S SCC Builders Private Ltd द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा था, जिसमें कंपनी ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत पारित आदेश को चुनौती दी थी। विवाद गाजियाबाद स्थित ‘SCC Sapphire’ नामक आवासीय परियोजना में एक फ्लैट आवंटी की पार्किंग से संबंधित था।

READ ALSO  उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने का आग्रह करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

शिकायतकर्ता, जो 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं, ने आरोप लगाया था कि फ्लैट खरीदने के करीब आठ साल बाद बिल्डर ने उनकी पार्किंग को विभाजित कर दिया, जिससे लिफ्ट तक पहुंच में बाधा उत्पन्न हुई।

राज्य दिव्यांग आयुक्त ने जांच के बाद शिकायत को सही माना और पाया कि बिल्डर की इस कार्रवाई से आवंटी को सामान्य सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। इसके खिलाफ बिल्डर ने हाईकोर्ट का रुख किया।

READ ALSO  एक बार तय की गई वरिष्ठता कई वर्षों के बाद भी बरकरार नहीं रखी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हालांकि, अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता कंपनी का प्रतिनिधि आयोग की कार्यवाही में उपस्थित था और पार्किंग का विभाजन मूल आवंटी की सहमति के बिना किया गया था। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

अंत में अदालत ने दोहराया कि किसी भी आवासीय भवन में सामान्य सुविधाओं तक दिव्यांगजनों की निर्बाध पहुंच उनका मौलिक अधिकार है और इस सिद्धांत से समझौता नहीं किया जा सकता।

READ ALSO  विदेश यात्रा की शर्त पर पत्नी को भारत में रहने का निर्देश अवैध: सुप्रीम कोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles