केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला में कर्मचारियों को हेल्थ कार्ड जारी करने में कथित अनियमितताओं की पुलिस जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कर्मचारियों के लिए केवल केरल के सरकारी चिकित्सा अधिकारियों द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र ही स्वीकार किए जाएं।
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने पथानामथिट्टा जिले के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि सन्निधानम के स्वास्थ्य निरीक्षक द्वारा कथित अवैध हेल्थ कार्ड के संबंध में दर्ज कराई गई शिकायत की उचित जांच सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं और किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
सरकारी डॉक्टरों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र ही होंगे मान्य
हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को निर्देश दिया कि विभिन्न विशेष व्यवस्थाओं के तहत नियुक्त कर्मचारियों के साथ-साथ केरल दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम के अंतर्गत आने वाली दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए केवल सरकारी चिकित्सा अधिकारियों द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र स्वीकार किए जाएं। यह निर्देश उन प्रतिष्ठानों पर भी लागू होगा, जहां खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण टीमों को नियमित जांच के दौरान कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने का निर्देश दिया। टीमों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रमाणपत्र स्वास्थ्य सेवा निदेशक द्वारा जारी सर्कुलर के अनुरूप हों।
बेंच ने कहा कि सबरीमाला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
बिना मेडिकल जांच के हेल्थ कार्ड जारी करने का आरोप
यह मामला सबरीमाला के विशेष आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर सामने आया था। रिपोर्ट मिलने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, पथानामथिट्टा के जिला चिकित्सा अधिकारी (स्वास्थ्य) को सन्निधानम के स्वास्थ्य अधिकारी से हेल्थ कार्ड जारी करने में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी मिली थी।
आरोप था कि सन्निधानम के दो प्रतिष्ठानों में कार्यरत कुछ कर्मचारियों और निलक्कल के पांच व्यक्तियों को ऐसे हेल्थ कार्ड जारी किए गए, जिन पर कथित तौर पर एक डॉक्टर के हस्ताक्षर थे।
ये दस्तावेज व्हाट्सऐप के माध्यम से एक ऐसे मोबाइल नंबर से भेजे गए थे, जो ‘मंजू महिमा’ नाम से सेव था।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित व्यक्तियों की मेडिकल जांच या ब्लड टेस्ट किए बिना ही स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।
मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को शिकायत की जांच सुनिश्चित करने और आरोप साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने विशेष आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही का निस्तारण कर दिया।
