केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जनप्रतिनिधियों के लिए कानूनी प्रारूप में ही शपथ लेना अनिवार्य, देवी-देवताओं या नेताओं के नाम पर ली गई शपथ अमान्य

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को केवल कानून द्वारा तय किए गए प्रारूप में ही शपथ लेनी होगी। कोर्ट ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कई भाजपा पार्षदों और पालक्काड जिले के एक पंचायत सदस्य की शपथ को अमान्य घोषित कर दिया, जिन्होंने कानून में निर्धारित शब्दों से अलग हटकर देवी-देवताओं या राजनीतिक हस्तियों के नाम पर शपथ ली थी।

जस्टिस पी वी कुन्हीकृष्णन की एकल पीठ ने साफ किया कि केरल नगरपालिका अधिनियम और केरल पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्वाचित सदस्यों को केवल ‘ईश्वर के नाम पर’ शपथ लेने या ‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’ करने का ही अधिकार है। कानूनन तय इस प्रारूप में अपनी पसंद के देवी-देवताओं, “भारत माता”, राजनीतिक शहीदों, संगठनों या किसी विशिष्ट व्यक्ति का नाम जोड़ना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

क्या था पूरा मामला?

यह कानूनी विवाद दो अलग-अलग मामलों से जुड़ा है। पहले मामले में तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों ने शपथ ग्रहण के दौरान विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं, “भारताम्बा”, “भारत माता”, समाज सुधारक गुरुदेव और अपनी पार्टी के शहीदों के नाम शामिल किए थे। वहीं, दूसरे मामले में पालक्काड जिले की वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत के एक निर्वाचित सदस्य ने ईश्वर के साथ-साथ दिवंगत राजनीतिक नेता ओमन चांडी के नाम पर शपथ ली थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि देश के हर नागरिक को अपनी पसंद के किसी भी भगवान की पूजा करने या धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन जब बात वैधानिक शपथ की आती है, तो कानून द्वारा निर्धारित शब्दों में कोई भी बदलाव या विस्तार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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जनमत सुरक्षित, चार सप्ताह में दोबारा लेनी होगी शपथ

अदालत ने जनमत का सम्मान करते हुए प्रतिनिधियों की सदस्यता को खारिज नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि उनका चुनाव पूरी तरह वैध रहेगा। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि प्रभावित पार्षदों और पंचायत सदस्य के लिए अगले चार सप्ताह के भीतर कानून के मुताबिक नए सिरे से शपथ ग्रहण की व्यवस्था की जाए।

इसके साथ ही, इन सदस्यों पर कोई जुर्माना या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, क्योंकि कोर्ट ने माना कि उन्होंने सद्भावपूर्ण विश्वास के साथ यह शपथ ली थी कि उनका ऐसा करना वैध है।

पिछले फैसलों और कामकाज पर कानूनी असर

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शपथ अमान्य होने के बाद इन सदस्यों द्वारा अब तक किए गए कार्यों को लेकर कोर्ट ने दोनों मामलों में कानूनी अंतर स्पष्ट किया है। केरल नगरपालिका अधिनियम की धारा 531 के तहत तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षदों द्वारा अब तक किए गए सभी आधिकारिक कार्य और फैसले पूरी तरह सुरक्षित यानी वैध रहेंगे।

इसके विपरीत, केरल पंचायत राज अधिनियम में ऐसा कोई सुरक्षात्मक प्रावधान न होने के कारण, वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत के सदस्य द्वारा अब तक किए गए सभी आधिकारिक कार्यों को अदालत ने अमान्य घोषित कर दिया है। हालांकि, दोबारा शपथ लेने के बाद वह अपना कामकाज सामान्य रूप से जारी रख सकेंगे।

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धर्मनिरपेक्षता और शपथ की शुचिता

जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के उपदेशों और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांत का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोग सर्वशक्तिमान ईश्वर को अलग-अलग नामों से पुकार सकते हैं, लेकिन कानूनन शपथ केवल ‘ईश्वर के नाम पर’ या सत्यनिष्ठा से ही ली जा सकती है।

अदालत के अनुसार, शपथ जनता के प्रति एक गंभीर वादा है कि प्रतिनिधि संविधान और कानून के शासन का पालन करेगा और ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा। इसलिए, शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन ठीक उसी प्रकार होना चाहिए जैसा कि कानून में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है।

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