साल्ट लेक स्टेडियम हंगामा: पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास की सुरक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर 2 जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई

कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच आगामी 2 जुलाई को पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को मिली अंतरिम राहत को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई करेगी। यह मामला पिछले साल दिसंबर में साल्ट लेक स्टेडियम में फुटबॉल स्टार लियोनेल मेस्सी के एक कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे से जुड़ा है।

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को शुरुआती सुनवाई के बाद इस मामले को स्थगित कर दिया। दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा किए गए संयुक्त अनुरोध के बाद अदालत ने अंतिम सुनवाई के लिए जुलाई की शुरुआत की यह तारीख तय की।

शिकायतकर्ता की याचिका और कानूनी दलीलें

इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता शतरुद्र दत्ता ने हाईकोर्ट की एकल पीठ (सिंगल बेंच) द्वारा अरूप बिस्वास को दी गई अंतरिम सुरक्षा को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच का रुख किया है। दत्ता ने इस राहत को कानूनी रूप से गलत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान बिस्वास के वकील ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि शतरुद्र दत्ता केवल मामले के शिकायतकर्ता हैं, इसलिए उन्हें अदालत द्वारा किसी आरोपी को दी गई सुरक्षा के खिलाफ अपील करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

अंतरिम राहत की शर्तें और जांच की स्थिति

यह पूरा विवाद हाईकोर्ट की एकल पीठ के उस आदेश से जुड़ा है, जिसे न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने 10 जून को जारी किया था। इस आदेश के तहत अरूप बिस्वास को 17 अगस्त तक पुलिस की किसी भी दंडात्मक या सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई थी। हालांकि, अदालत ने इस राहत के साथ यह शर्त भी रखी थी कि बिस्वास अदालत की पूर्वानुमति के बिना स्टेशन (शहर) छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे।

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इस अदालती राहत से पहले बिस्वास बिधाननगर पुलिस द्वारा भेजे गए दो समन पर पेश नहीं हुए थे। हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने मंगलवार को डिवीजन बेंच को सूचित किया कि एकल पीठ से राहत मिलने के बाद बिस्वास पुलिस के नोटिस का पालन कर रहे हैं और पूछताछ की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पुलिस के सामने पेश हो चुके हैं।

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