शराब जब्ती मामला: केरल हाईकोर्ट ने रिपोर्टर टीवी के मैनेजिंग एडिटर एंटो ऑगस्टीन को दी जमानत

केरल हाईकोर्ट ने तय कानूनी सीमा से अधिक विदेशी शराब रखने के मामले में रिपोर्टर टीवी के मैनेजिंग एडिटर एंटो ऑगस्टीन को मंगलवार को जमानत दे दी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा कि आरोपी से जब्ती की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और पुलिस हिरासत की अवधि भी समाप्त हो चुकी है, ऐसे में उन्हें और अधिक समय तक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने उस परिसर पर आरोपी के वास्तविक कब्जे को लेकर खड़े हुए गंभीर विवाद को भी रेखांकित किया, जहां से शराब बरामद की गई थी।

परिसर के मालिकाना हक और कब्जे पर विवाद

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जिस इमारत से कथित तौर पर शराब बरामद की गई, वह चार साल से भी अधिक समय पहले बेची जा चुकी थी और याचिकाकर्ता का उस पर कोई दखल या नियंत्रण नहीं था। याचिका के अनुसार, 14.67 एयर भूमि और उस पर बनी इमारत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के पास गिरवी रखी गई थी। बैंक के अधिकृत अधिकारी ने सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act, 2002) के तहत कार्रवाई करते हुए 30 जून 2022 को ई-नीलामी के जरिए यह संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी थी। इसके बाद 13 सितंबर 2022 को बैंक ने इसका औपचारिक सेल सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने यह भी रेखांकित किया कि जब्ती के समय ऑगस्टीन घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। जांच एजेंसी की आधिकारिक क्राइम एंड अकरेंस रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि दर्ज है कि मौके पर उपस्थित न होने के कारण उन्हें वहां से गिरफ्तार नहीं किया गया था। बचाव पक्ष के अनुसार, जांच अधिकारियों को किसी भी निवासी, पड़ोसी या स्वतंत्र गवाह का ऐसा कोई बयान नहीं मिला है जो तलाशी वाले कमरे या बरामद सामग्री के साथ आरोपी का सीधा संबंध जोड़ता हो। ऐसे में अपराध का मुख्य आधार यानी ‘सचेत कब्जा’ (कॉन्शियस पजेशन) स्थापित नहीं होता।

मजिस्ट्रेट कोर्ट की पिछली कार्यवाही का जिक्र करते हुए बचाव पक्ष ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने मुत्तिल ग्राम पंचायत द्वारा जारी बिल्डिंग सर्टिफिकेट को आधार बनाकर जमानत अर्जी खारिज की थी और उस चरण में बैंक के सेल सर्टिफिकेट को निर्णायक नहीं माना था। याचिकाकर्ता के अनुसार, पंचायत का बिल्डिंग सर्टिफिकेट केवल संपत्ति कर निर्धारण का प्रशासनिक रिकॉर्ड होता है, न कि मालिकाना हक या वास्तविक कब्जे का कानूनी प्रमाण। म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे रिकॉर्ड में पूर्व मालिक का नाम ही दर्ज रहता है।

READ ALSO  एनसीडीआरसी ने डीके रियलिटी को बुकिंग राशि वापस करने और फ्लैटों की डिलीवरी में देरी के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया

अभियोजन ने दिया आपराधिक मामलों और उपयोगिता बिलों का हवाला

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन महानिदेशक (डीजीपी) टी. आसफ अली ने तर्क दिया कि यह कोई सामान्य आबकारी उल्लंघन का मामला नहीं है। उन्होंने आरोपी को बेहद साधन संपन्न और रसूखदार व्यक्ति बताते हुए अदालत को अवगत कराया कि ऑगस्टीन के खिलाफ पहले से 41 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अभियोजन का कहना था कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और जांच पूरी तरह ठप पड़ चुकी है, इसलिए उनकी निरंतर न्यायिक हिरासत आवश्यक है।

READ ALSO  टर्नओवर और आयकर रिटर्न अलग, टेंडर प्रक्रिया में दोनों को समान नहीं माना जा सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

सरकारी वकील ने संपत्ति से बेदखली के दावे को चुनौती देते हुए दलील दी कि मार्च 2026 में उस इमारत का संपत्ति कर ऑगस्टीन के नाम पर ही जमा किया गया था। इसके अतिरिक्त, परिसर के बिजली और पानी के कनेक्शन अब भी उनके नाम पर ही सक्रिय हैं तथा स्थानीय मतदाता सूची में भी उनका नाम इसी पते पर दर्ज है, जो यह दर्शाता है कि संपत्ति पर उनका वास्तविक नियंत्रण बना हुआ था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) से संबंधित मामलों में आम तौर पर जमानत दी जाती रही है। अदालत ने माना कि जब्ती की औपचारिक प्रक्रिया संपन्न होने और पुलिस पूछताछ पूरी हो जाने के बाद आरोपी को लगातार जेल में रखने की आवश्यकता नहीं है, जिसके बाद उन्हें रिहा करने का आदेश जारी किया गया।

READ ALSO  केंद्र ने वक्फ अधिनियम संशोधनों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की, सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles