कपूर फैमिली ट्रस्ट विवाद: पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ संभालेंगे मध्यस्थता की कमान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘इसे मनोरंजन का जरिया न बनाएं’

देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने, कपूर परिवार के बीच चल रहे ट्रस्ट विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है। शीर्ष अदालत ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां और पत्नी के बीच जारी कानूनी लड़ाई को सुलझाने के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ (Mediator) नियुक्त किया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को निजी विवाद को सार्वजनिक न करने की सख्त हिदायत दी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक पारिवारिक मामला है और इसे परिवार तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। पीठ ने रानी कपूर और प्रिया कपूर दोनों को निर्देशित किया कि वे इस विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट न करें और न ही कोई सार्वजनिक बयान जारी करें।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह एक पारिवारिक विवाद है। इसे मनोरंजन का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।” कोर्ट ने दोनों पक्षों से खुली मानसिकता के साथ मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।

यह कानूनी लड़ाई 80 वर्षीय रानी कपूर (संजय कपूर की मां) और प्रिया कपूर (संजय कपूर की पत्नी) के बीच एक फैमिली ट्रस्ट को लेकर है, जिसका गठन अक्टूबर 2017 में हुआ था।

रानी कपूर ने इस ट्रस्ट को ‘अमान्य’ घोषित करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज ‘फर्जी और जाली’ हैं। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में ट्रस्ट की संपत्तियों की स्थिति ज्यों की त्यों (Status Quo) बनाए रखने की मांग की गई है, ताकि कानूनी फैसला आने तक संपत्तियों को बेचा या हस्तांतरित न किया जा सके।

अदालत ने बताया कि 27 अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई में मध्यस्थता का सुझाव दिया गया था, जिस पर गुरुवार को दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी सहमति दे दी। पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ अब इस मामले में मध्यस्थ के रूप में कार्य करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ से इस मामले में एक प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी है। अब इस विवाद पर अगली सुनवाई अगस्त में होगी, जहां मध्यस्थ की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी। गौरतलब है कि संपत्ति के नियंत्रण से जुड़े अन्य संबंधित मामले फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में भी लंबित हैं।

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