शादी के वक्त बिमारी को छुपाने पर विवाह शून्य घोषितः केरल हाईकोर्ट

हाल ही में, केरल के उच्च न्यायालय ने एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह को शून्य घोषित कर दिया क्योंकि विवाह के समय महिला ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया था कि वह हृदय रोग (एक्यूट रूमेटिक हार्ट डिजीज) से पीड़ित थी।

मामले के संक्षिप्त तथ्य –

वर्ष 2004 में, व्यक्ति के माता-पिता ने अपने बेटे के लिए दुल्हन की तलाश शुरू की। 28 मार्च 2004 को गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर में दोनों की शादी र्हइुं। उसके बाद, महिला ने अपने वैवाहिक घर में रहना शुरू कर दिया।

शादी के तुरंत बाद, पुरुष ने देखा कि महिला हमेशा दवाइयाँ ले रही थी, और यह उसके चरित्र पर भी प्रतिबिंबित होने लगा।

शादी के एक साल बाद उसे स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। परामर्श के दौरान, महिला ने डॉक्टर को सूचित किया कि वह दिल की बीमारी से पीड़ित है। डॉक्टर ने उसे कार्डियोलॉजिस्ट के पास भेजा। कुछ परीक्षण किए गए थे, और यह पता चला था कि वह तीव्र गठिया रोग से पीड़ित थी। बाद में, महिला ने खुलासा किया कि उसने 1998 में गुब्बारा सिनुप्लास्टी करवाया था।

डॉक्टर के परामर्श के दौरान यह भी पता चला कि वह गर्भ धारण नहीं कर सकती और संभोग करने में असमर्थ थी।

न्यायालय के समक्ष तर्क –

याचिकाकर्ता (पति) के वकील ने तर्क दिया कि शादी के लिए पुरुष के साथ धोखाधड़ी हुई थी, क्योंकि उसे महिला के दिल की बीमारी के बारे में सूचित नहीं किया गया था।

प्रतिवादी के वकील ने याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावे का खंडन किया और कहा कि पति को शादी से पहले महिला की स्थिति के बारे में सूचित किया गया था।

न्यायालय के तर्क और निर्णय –

मामले के सभी सबूतों, तर्कों और तथ्यों को देखने के बाद, माननीय न्यायालय ने कहा कि विवाह के लिए पति की सहमति को धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया था, क्योंकि उसे शादी से पहले महिला के हृदय रोग के बारे में सूचित नहीं किया गया था।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, और विवाह को शून्य घोषित कर दिया गया।

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